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पोखरण परीक्षण की 26वीं वर्षगांठ आज, जानिए भारत के इतिहास में क्यों अहम है ये तारीख

परमाणु शक्ति संपन्न होने के बाद ही भारत वैश्विक स्तर पर एक सैन्य और कूटनीतिक ताकत बनकर उभरा।

पोखरण परमाणु परीक्षण की आज 26वीं वर्षगांठ है। आज से 26 साल पहले 11 मई 1998 को अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने राजस्थान को पोखरण में परमाणु परीक्षण किए। इन परीक्षणों के साथ ही भारत ने राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में भारत ने बड़ी छलांग लगाई। आज भारत के पास पांच हजार किलोमीटर की दूरी तक मार करने वाली अग्नि बैलिस्टिक मिसाइल है और साथ ही तीन हजार किलोमीटर की दूरी तक मार करने वाली के-4 पनडुब्बी आधारित बैलिस्टिक मिसाइल हैं, जिनकी जद में पूरा चीन और पाकिस्तान आता है। परमाणु शक्ति संपन्न होने के बाद ही भारत वैश्विक स्तर पर एक सैन्य और कूटनीतिक ताकत बनकर उभरा।

कैसे हुई भारत के परमाणु कार्यक्रम की शुरुआत
साल 1945 में पहली बार प्रसिद्ध भौतिक विज्ञानी होमी जे भाभा ने तत्कालीन बंबई में परमाणु भौतिकी के क्षेत्र में अनुसंधान के लिए टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च की स्थापना की। टाईएफआर भारत का पहला परमाणु भौतिकी अनुसंधान संस्थान था। देश की आजादी के बाद भाभा ने तत्कालीन पीएम पंडित जवाहरलाल नेहरू को सरकार में परमाणु ऊर्जा विभाग के गठन के लिए मना लिया और इसके निदेशक भाभा ही बने। शुरुआत में भारत का जोर परमाणु ऊर्जा से स्वच्छ ऊर्जा हासिल करने पर जोर था, लेकिन पाकिस्तान के बार-बार आक्रमण और साल 1962 में चीन के हमले के बाद भारत सरकार ने गंभीरता से परमाणु शक्ति हासिल करने के बारे में सोचना शुरू किया। 

18 मई 1974 को तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी के नेतृत्व में देश ने पोखरण में पहला परमाणु परीक्षण किया। 

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