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संपादकीय / गुस्ताखी माफ / मधुर वचन / शायरी / कहानी

आज यदि युधिष्ठिर वाला यक्ष, सवाल पूछता कि सबसे तेज क्या चलता है ? देश में माल है या नहीं ? 


नेताजी और यक्ष प्रश्न  .  आज यदि युधिष्ठिर वाला यक्ष, सवाल पूछता कि सबसे तेज क्या चलता है ? देश में माल है या नहीं ? 

बचपन में एक कहानी पढ़ी थी “ युधिष्ठिर और यक्ष “ . इस कहानी में प्यासे पांडवों से यक्ष सवाल

पूछते हैं जिनका जवाब अंततः केवल चक्रवर्ती सम्राट युधिष्ठिर ही दे पाते हैं . बाकी सबसे यक्ष के
सवालों का सही जवाब देते नहीं बनता था और एक के बाद एक पांडव यक्ष की शर्तों के अनुसार

मूर्छित (बेहोश) हो जाते थे . पत्रकार माधो की चपाल  में यह चर्चा चल ही रही थी कि एक ने यकायक दूसरे वरिष्ठ पत्रकार से सवाल पूछ लिया , आज के समयानुकूल कौन से सवाल हमारे महाराजाओं (राजनेताओं) से
पूछे जाने चाहिए . दूसरे वरिष्ठ पत्रकार मुस्कुराते हुए बोले , आज यक्ष प्रश्न का अर्थ होता है अनुत्तरित सवाल
याने जिस तात्कालिक सवाल का जवाब देना बहुत मुश्किल हो . चलो मैं आज आपको कुछ ऐसे ही
सवाल बताता हूँ . आप पूछ सकते हैं कि भष्टाचार कब ख़त्म होगा ? कीमतें कब नीचे उतरेगी ? इस
क्षेत्र की सड़कों की हालत कब सुधरेगी , बैलगाड़ी वाले भी इसपर चलने से डरते हैं ? किसान खराब
बीजों , खराब खाद , फसलों की कम कीमत और उनकी जमीनों के कम कीमतों पर अधिग्रहण से
परेशानी के कारण आत्महत्या करना कब छोड़ेंगे ? बिजली की कटौती कब कम होगी और उसकी
बेलगाम बढ़ती कीमतों पर कब कमी आएगी ताकि उद्योगपति चैन से उद्योग चला सकें ? 
जनता से लिए टैक्स का शत प्रतिशत सही उपयोग कब होगा ? राजनीति अपराधमुक्त कब और कैसे होगी ?
राजनेता , सच्चे देश सेवक कब बनेंगे ?  अब मैंने उन्हें रोकते हुए कहा कि ये ऐसे सवालों की फेहरिस्त बहुत लम्बी है . इन सवालों के जवाब नेता देने के पहले बेहोश होना पसंद करेंगे . आज की आम जनता को भी ये सवाल पूछना पसंद नहीं हैं . आम जनता तो केवल यह पूछना चाहती है कि सरकार की तरफ से मुफ्त में क्या-क्या दे सकते हो और कब तक ? फिर आम लोग आपस में खुसुर -पुसुर करते हैं कि यदि अभी राजनेता कोई जवाब दे या ना दे , अगले चुनाव के पहले तो उसे घोषणा करनी ही पड़ेगी . अब हर पत्रकार मित्र अपने अपने तर्क देकर अपनी बात रखने लगा . किसी ने कहा , आज यदि युधिष्ठिर वाला यक्ष, सवाल पूछता कि सबसे तेज क्या चलता है ? जवाब होता ,सबसे तेज तो भ्रष्टाचार ही चलता है। आजादी के बाद देखो भष्टाचार का कितना विकास हुआ है। पहले जितना मंत्री कमाता था , उतना आज संत्री कमाता है। कोई बोला आज का नेता सबसे बहादुर होता है, किसी से नहीं डरता है इसलिए निर्भीक होकर मनमाने ढंग से खाता है . तो किसी ने कहा कि देश में माल है तब
तो कमाल दिख रहा है। खाने के लिये नहीं रहता तो लूटने के लिये कहाँ से आता ?  तब आक्रोश से बढ़ते शोर को शांत करते हुए पत्रकार माधो ने कहा , प्रसन्न रहना है तो बहकावे में आ  जाओ , अपनी अकल मत लगाओ और मेरे साथ कोरस में गाओ “ अच्छे दिन अब आने वाले हैं “

इंजी . मधुर चितलांग्या 
प्रधान संपादक ,  दैनिक पूरब टाइम्स 

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