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अयोध्या के राम की तरह, यहां हैं काले हनुमान, इस दुर्लभ प्रतिमा की लंका दहन से जुड़ी है कहानी

हनुमान मंदिर तो देशभर में कई हैं. उनकी प्रतिमाएं भी एक जैसी ही होती हैं. बस कहीं कद बड़ा होता है तो कहीं छोटा. कहीं एक मुखी प्रतिमा तो कहीं पंचमुखी हनुमान. लेकिन राजस्थान के भरतपुर में हनुमान की बिरली प्रतिमा है. इसकी कहानी भी नागा साधुओं से जुड़ी है. वैसे तो देश भर में आपको हनुमान जी के एक से बढ़कर एक मंदिर मिल जाएंगे जिनकी अलग-अलग विशेषताएं और मान्यताएं होती हैं. देश में कई ऐतिहासिक और पुराने हनुमान मंदिर भी हैं जिनमें उनकी प्रतिमाएं भी अलग-अलग प्रकार की और अनोखी होती हैं. हम आज बात कर रहे हैं एक अनोखे मंदिर की जिसमें अयोध्या में स्थापित राम की तरह यहां हनुमान की भी काली प्रतिमा है. बाकी पूरे देश में हर जगह हनुमान प्रतिमा गेरुए रंग की होती है.

हनुमान की काली प्रतिमा
भरतपुर शहर के मुख्य बाजार गंगा मंदिर के पीछे ये प्राचीन हनुमान मंदिर है. इसकी विलक्षणता ये है कि इसमें हनुमान प्रतिमा गेरुए या भगवा रंग की न होकर काले रंग की है. इनका नाम ही श्री काले हनुमान जी का मंदिर है. यह मंदिर लोगों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है. कहते हैं इस मंदिर में सच्चे दिल से मांगी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. मंदिर के पुजारी बताते हैं सच्चे मन से आने वाले लोगों के इस मंदिर में बिगड़े हुए काम बन जाते हैं. इसी के साथी इस मंदिर में दर्शन करने से संतान भी की प्राप्ति होती है.

नागा साधु और बाल ब्रह्मचारी
मंदिर के पुजारी पंडित लाल बताते हैं कि भरतपुर ब्रज में नागा साधुओं का आना-जाना लगा रहता था. यहां के लोग और हमारे पूर्वज बताते हैं करीब 150 साल पहले कुछ नागा साधु हनुमान जी की इस काली मूर्ति को बैलगाड़ी में रखकर लेकर जा रहे थे. लेकिन इस स्थान पर आने पर गाड़ी आगे नहीं बढ़ी. उन्होंने काफी प्रयास किए लेकिन विफल रहे. फिर हार कर उन्होंने इस मूर्ति को यहीं स्थापित कर दिया.

काला चोला-केसरिया रंग
मंदिर के पुजारी लाल बताते हैं इस मूर्ति को काले हनुमान जी की मूर्ति के नाम से जाना जाता है. इनका मुंह केसरिया रंग का है और इस मूर्ति पर काला चोला चढ़ाया जाता है. कहते हैं लंका दहन के समय हनुमानजी का शरीर काला हो गया था. ये प्रतिमा उसी हनुमान की प्रतिकृति मानी जाती है. इन्हें काले हनुमान जी के नाम से जाना जाता है. काला स्वरूप होने की वजह से इन पर काला चोला चढ़ाने के साथ केसरिया रंग केवल मुंह पर लगाया जाता है.

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