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बंद होगी कडकडाहट... कमजोर हड्डी में फूंक देगा जान, कमाल है इस पौधे का जूस

रायपुरः- भारत में सदियों पुरानी परंपरा में से एक परंपरा आयुर्वेद चिकित्सा का भी है. दरअसल भारत में प्राचीन काल से आयुर्वेद का बोलबाला है. औषधीय पौधों की सहायता से हर इलाज संभव है. आयुर्वेद में टूटी हड्डी को जोड़ने के लिए हड़जोड़ पौधे को कारगर दवा माना गया है. हरे और भूरे रंग का यह पौधा स्वाद में कसैला और तीखा होता है. इसकी लता में गांठ होती है और इस पौधे की प्रकृति गर्म होती है. यह खाने के साथ लगाने के काम में भी आता है. हड़जोड़ में सोडियम, पोटैशियम, कार्बोनेट भरपूर मात्रा में पाया जाता है. इसमें मौजूद कैल्शियम कार्बोनेट और फॉस्फेट हड्डियों को मजबूत कर देता है. रायपुर स्थित शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. राजेश सिंह ने लोकल 18 को बताया कि हड़जोड़ के पौधे को आयुर्वेद में अस्थि श्रृंखला कहते हैं. इसके तने में बहुत सारा कैल्शियम पाया जाता है. हड़जोड़ का पौधा लता के रूप होता है, जो अन्य पेड़ों में चढ़ती है. इसमें बहुत कम पत्ते होते हैं और इसे आसानी से पहचाना जा सकता है, क्योंकि इसमें जॉइंट बने होते हैं और लता चौकोर होती है. तने में चार एंगल होते है. इसे आयुर्वेद में दो गांठो की बीच की दूरी को चीर पाक कहते हैं. चीर पाक विशेष औषधि बनाने का तरीका है.

ऐसे बनता है चीर पाक
असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. राजेश सिंह ने Local 18 को आगे बताया कि हड़जोड़ के एक गांठ का जितना वजन रहता है, उसका चार गुना दूध लेते हैं और दूध का चार गुना पानी लेते हैं. फिर इसे धीमी आंच में पकाया जाता है. जब पूरा पानी पकते-पकते उड़ जाता है, तो समझो चीर पाक बन गया. उस दूध को छान कर मरीज को पिलाया जाता है. इससे शरीर में कैल्शियम बाइंडिंग का प्रोसेस बहुत तेजी से बढ़ता है. इसका उपयोग हड्डी टूटने से जोड़ने में काफी कारगर होती है और जिन्हें ऑस्टियोपोरोसिस यानी कमजोर हड्डी की दिक्कत है, ऐसे लोग अगर इसका सेवन करेंगे, तो उनकी हड्डी मजबूत हो जाएगी. जिन्हें विटामिन डी की डिफिशिएंसी है और कैल्शियम की कमी है, ऐसे लोगों को हड़जोड़ पौधे का इस्तेमाल करना चाहिए.

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