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क्षेत्र में निष्क्रियता पड़ी भारी, छत्तीसगढ़ के सात सांसदों का कटा टिकट, पार्टी ने नए चेहरों पर खेला दांव

 रायपुर। भाजपा की लोकसभा प्रत्याशियों की सूची हाल ही संपन्न हुए विधानसभा चुनाव की तरह चौंकाने वाली है। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 11 सीटों में से नौ सीटों पर कब्जा जमाया था। इस बार भाजपा ने 2024 के लोकसभा के लिए सात सीटों पर नए चेहरों पर दांव खेला है। जिनके टिकट कटे, उनमें रायपुर लोकसभा संसदीय सीट से सुनील सोनी शामिल हैं। इसके साथ ही महासमुंद, कांकेर, जांजगीर-चांपा के सांसदों को भी टिकट काटी गई है। राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि कमजोर जनाधार, क्षेत्र में निष्क्रियता की वजह से उन्हें खामियाजा भुगतना पड़ा। भाजपा के आंतरिक सर्वे में भी कमजोर जनाधार का मुद्दा छाया रहा। सांसदों के बारे में निगेटिव फीडबैक की वजह से उन्हें मौका नहीं मिला। सरगुजा सांसद रेणुका सिंह को भाजपा ने विधानसभा में प्रत्याशी बनाया था। इसलिए उनकी टिकट बदलना स्वाभाविक रहा। यही स्थिति रायगढ़ में गोमती साय की रही। वह वर्तमान में भाजपा विधायक हैं। इसलिए भी यहां नया लोकसभा प्रत्याशी है।

 

 

 

 

महासमुंद : पार्टी प्रत्याशी के खिलाफ काम

 

 

महासमुंद लोकसभा के मौजूदा सांसद चुन्नीलाल साहू के टिकट कटने के मामले में यह कारण भी बताया जा रहा है कि उन्होंने स्वयं के गृह क्षेत्र खल्लारी विधानसभा के पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में काम नहीं किया। सूत्रों के मुताबिक भाजपा ने इसका जमीनी व गोपनीय सर्वे कराया, जिसके तहत दर्जन भर से अधिक नेताओं के नाम पार्टी प्रत्याशी को सहयोग नहीं करने के लिए चिन्हित किए गए। यह नाम केंद्रीय नेतृत्व को भी भेजा गया। शुरू से ही यह चर्चा रही कि चुन्नीलाल साहू का टिकट काटा जा सकता है। इससे पहले साहू समाज के पदाधिकारियों से विवाद भी केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचा था। हालांकि चुन्नीलाल साहू ने मीडिया से चर्चा में कहा कि उन्हें टिकट कटने से नाराजगी नहीं है। इस बार भाजपा 400 सीटों का आंकड़ पार करेगी।

 

 

 

 

 

 

 

जांजगीर-चांपा : सांसद गांवों तक भी नहीं पहुंचें

 

 

वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने यहां से सांसद रहीं कमला पाटले का टिकट काटकर सारंगढ़ लोकसभा के पूर्व सांसद गुहाराम अजगले को टिकट दिया था। अजगले के टिकट कटने की मुख्य वजह उनका क्षेत्र में निष्क्रिय रहना माना जा रहा है। यहां तक कि वह सांसद गांवों में भी नहीं पहुंच सके। उनका टिकट काटकर उनकी जगह महिला उम्मीदवार कमलेश जांगड़े को टिकट दी गई है। जानकारी के मुताबिक सत्र के दौरान सदन में उनकी उपस्थिति तो ठीक थी, लेकिन उन्होंने पांच साल में महज पांच सवाल सदन में किए, जबकि उन्होंने छह विषयों में बहस में हिस्सा लिया था।

 

 

 

 

 

 

 

रायपुर : पांच साल की निष्क्रियता पड़ी भारी

 

 

रायपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद सुनील सोनी के बारे में भी निगेटिव फीडबैक की वजह से उन्हें टिकट कटने का खामियाजा भुगतना पड़ा। पांच वर्ष की निष्क्रियता की वजह से भी क्षेत्र की जनता मौजूदा सांसद से नाराज रही। क्षेत्र के मुद्दों के साथ ही जनता की मांगों पर काम नहीं हुआ। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सोनी को लेकर ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में आंतरिक सर्वे में सबसे नकारात्मक रिपोर्ट मिली थी। बृजमोहन अग्रवाल को टिकट देने की तैयारी काफी पहले ही शुरू हो चुकी थी।

 

 

 

 

 

 

 

कांकेर: रामायणी सांसद का छलका दर्द

 

 

कांकेर के सांसद मोहन मंडावी को रामायणी सांसद के रूप में जाना जाता था। पार्टी ने उन पर दोबारा भरोसा नहीं जताया है। उनकी बराबरी के योग्य प्रत्याशी की खोज भोजराज नाग पर जा टिकी। टिकट कटने पर मोहन मंडावी का दर्द छलका है। मीडिया से चर्चा में उन्होंने कहा कि कहा जा रहा था कि मुझे टिकट दिया जाएगा। ऐसी चर्चा भी थी कि लोकसभा में मेरी ओर से अच्छे-अच्छे प्रश्न लगाए गए थे। विकास भी हुआ, लेकिन यह पार्टी का निर्णय है। मंडावी ने कहा कि समाज के लोग नाराज बताए जा रहे हैं। पार्टी ने जो काम दिया है। वह काम करेंगे। नए प्रत्याशी का प्रचार भी करेंगे। टिकट मिलना या नहीं मिलना यह पार्टी के निर्णय पर निर्भर करता है। मैं इस बारे में ज्यादा कुछ नहीं कह सकता।

 

 

 

 

 

 

 

सरगुजा : नए चेहरे का संकेत पहले ही मिल गया था

 

 

सरगुजा संसदीय सीट से वर्ष 2019 के चुनाव में रेणुका सिंह लोकसभा सदस्य निर्वाचित हुईं थी। मोदी मंत्रिमंडल में शामिल होने वाली छत्तीसगढ़ से इकलौती लोकसभा सदस्य रेणुका सिंह को विधानसभा चुनाव में भरतपुर-सोनहत विधानसभा से टिकिट देकर भाजपा ने यह संकेत दे दिया था कि इस बार नए चेहरे पर दांव लगाया जाएगा। रेणुका सिंह वर्तमान में विधायक हैं। उनके लोकसभा सदस्य निर्वाचित होने के बाद सरगुजा संसदीय क्षेत्र के लोगों ने वर्षों पुरानी रेल सुविधा विस्तार की मांग पूरी होने की आस लगाई थी, लेकिन दिल्ली तक एक साप्ताहिक ट्रेन को छोड़कर रेणुका के कार्यकाल में कोई उल्लेखनीय कार्य नहीं हुआ। केंद्र में राज्यमंत्री होने के कारण भी संसदीय क्षेत्र के लोगों से उनका संपर्क थोड़ा कम हुआ था। व्यस्तता के कारण भी क्षेत्र में उनकी उपस्थिति से माहौल अनुकूल नहीं रह गया था। विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान कई समर्थकों ने उन्हें सीएम दीदी के रूप में भी प्रचारित किया था।

 

 

 

 

 

इनका टिकट कटा

 

 

1. सुनील सोनी- रायपुर

 

 

2. रेणुका सिंह-सरगुजा (वर्तमान भाजपा विधायक)

 

 

3. गोमती साय-रायगढ़ (वर्तमान भाजपा विधायक)

 

 

4. गुहाराम अजगले-जांजगीर-चांपा

 

 

5. अरुण साव- बिलासपुर (वर्तमान उप मुख्यमंत्री)

 

 

6. चुन्नी लाल साहू-महासमुंद

 

 

7. मोहन मंडावी-कांकेर

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