• 13-06-2024 23:02:45
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संत ललितप्रभ का संदेश, माता-पिता की सेवा करिए, उनसे बड़ा धन कुछ भी नहीं

रायपुर। एक दिन बुढ़ापा सबको आना है, आज आपने बड़ों की सेवा नहीं की तो कल आपके बच्चे भी वैसा ही करेंगे। वे भाग्यशाली होते हैं, जिनके घर में बड़े-बुजुर्गों का वास होता है। यदि आप अपने घरवालों से वास्तव में प्रेम करते हैं तो कभी भी बड़ों का दिल मत दुखाना। यह संदेश आउटडोर स्टेडियम में संत ललितप्रभ महाराज ने दिया।

संत ने कहा कि बड़े-बुजुर्ग भी अपना दायित्व निभाएं और पुत्रवधु को पुत्री से भी अधिक प्रेम दें। पराए घर की पुत्री को घर पर लाना बहुत सरल है पर उसके हृद्य को जीतना बहुत बड़ी साधना है। हर सास अपनी पुत्रवधु को इतना प्रेम दे कि वह अपना पीहर भूल जाएं। बहुएं भी अपनी सासू मां को इतना सम्मान दें कि सास उन्हें अपनी पुत्री मानें। घर में जब प्रेम का ऐसा वातावरण होता है तब घर स्वर्ग बन जाता है। समाज के ट्रस्टी-सदस्य बाद में बन जाना, सबसे पहले अपने घर के जिम्मेदार सदस्य बनकर बड़े-बुजुर्गों की देखभाल करना होगा।

बंटवारे में माता-पिता को मांगना

माता-पिता को नित्य प्रात: प्रणाम करिए। उन्होंने आपको बड़े प्रेम से पाला है। यदि घर में बंटवारे की बात आए तो आप माता-पिता को मांगना। आपका धनवान होना तय हो जाएगा। क्योंकि इनसे बड़ा धन संसार में कोई दूसरा नहीं है। जिस माता ने आपको जन्म देने गहन प्रसव पीड़ा सही, उस माता को बुढ़ापे में पीड़ा देने से बड़ा महापाप और क्या हो सकता है?

मकान कच्चे, रिश्ते होते थे सच्चे

पहले लोगोें के मकान छोटे होते थे पर उनमें रहने वालों के दिल बहुत बड़े होते थे। नौ-दस भाइयों का परिवार साथ-साथ रहा करता था। आज मकान बड़े हो गए पर लोगों के दिल छोटे हो गए हैं। पहले मकान भले, कच्चे होते थे लेकिन रिश्ते सच्चे होते थे। परिवार का निर्माण कभी भी विशाल कोठियों से नहीं होता। कई बार हमने कोठियों में नर्क को पलते देखा है और झोपड़ियों में स्वर्ग को पलते देखा है।

सुखी रहने के पांच उपाय

- घर को मंदिर मानिए।

- घर में कभी तनाव और टूटन को मत रखो। बड़प्पन दिखाओ

- शब्दों का उपयोग सावधानी और विवेक से करें।

- जब भी बोलें लाड़ की भाषा बोलें, राड़ की भाषा न बोलें।

- संकल्प लें कि मैं कभी भी स्वार्थी नहीं बनूंगा, अपितु सारथी बनूंगा।

ये चीजें न तोड़ें

जिंदगी में कभी भी संबंधों को मत तोड़िए। किसी का विश्वास मत तोड़िए। किसी को दिया गया वचन मत तोड़िए। कभी किसी का हृद्य मत तोड़िए।

 

 

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