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अरुण वोरा की असम्मानजनक हार में…राजेंद्र साहू की भूमिका क्या है ?

दुर्ग कांग्रेस की राजनीति

अरुण वोरा की असम्मानजनक हार मेंराजेंद्र साहू की भूमिका क्या है ?

बागियों / दलबद्लुओं को कांग्रेस में प्रवेश करने वाले फैसले की समीक्षा कब करेगी कांग्रेस ?

प्रदेश कांग्रेस कमेटी दुर्ग विधानसभा की करारी हार के लिए किसको जिम्मेदार मानती है ?

क्या आगामी लोकसभा चुनावों में भी कांग्रेस प्रवेश करने वाले ऐसे लोग नुकसान पहुंचायेंगे ?

पूरब टाइम्स , दुर्ग . छत्तीसगढ़ का दुर्ग जिला , संयुक्त मध्यप्रदेश के समय से ही कांग्रेस का गढ़ रहा है . यहां की धरा में चंदुलाल चंद्राकर , मोतीलाल वोरा जैसे राष्ट्रीय स्तर के नेता हुए हैं. पिछली विधानसभा में कांग्रेस के मुख्यमंत्री सहित 4 महाबली मंत्री इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते थेपरंतुइस बार के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की ज़बर्दस्त हार हुई है जिसका मुख्य कारण, मोह भंग के अलावा  कांग्रेसियों में भारी अंतर्कलह को बताया जा रहा है . जिले में सबसे ज़्यादा आंतरिक खींचतान दलबदल कर आए राजेंद्र साहू को लेकर हुई थी. इन राजेंद्र साहू ने कांग्रेस के विरोध में दुर्ग निगम के महापौर का चुनाव लड़ा, फिर सन 2013 में कांग्रेस के विरुद्ध दुर्ग शहर विधानसभा चुनाव भी लड़ा . उसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री से निकटता के कारण कांग्रेस में प्रवेश के साथ उच्च पदस्थ भी हो गये . इनके वर्चस्व में आने से पुराने खाटी कांग्रेसियों में असंतोष बढ़ गया था. अब देखने वाली बात होगी कि लोकसभा चुनाव में प्रदेश कांग्रेस हाई कमान उनकी क्या भूमिका तय करती है . पूरब टाइम्स की एक रिपोर्ट ..

समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भावनाओं पर कब तक दलबदलु हावी होते रहेंगे और क्या समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ता राजेंद्र साहू का नेतृत्व स्वीकारेंगे ?

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाओँ में कांग्रेस की करारी हार के बाद दुर्ग लोकसभा क्षेत्र जिसे कांग्रेस का वर्चस्व क्षेत्र माना जाता था,  इसमें विगत विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद से कांग्रेस अपने अस्तित्व को बचाने की लड़ाई लड़ रहीं है . सूत्रों की मानें तो इसका एक अहम कारण राजेंद्र साहू जैसे लोगों के समर्थकों को कांग्रेस में विशेष महत्व दिया जाना भी है । उल्लेखनीय है कि भूपेश बघेल, ताम्रध्वज साहू और टीएस सिहदेव के त्रिकोणीय राजनैतिक संघर्ष में भूपेश बघेल के सामने समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर विश्वास करने की स्थिति नहीं थी , जिसके कारण राजेंद्र साहू जैसे लोगों को कांग्रेस में प्रवेश मिला. जिसके बाद विशेषकर ताम्रध्वज साहू और अरुण वोरा के राजनैतिक समर्थकों और रिश्तेदारों को गुमराह किए जाने की स्थिति उत्पन्न की गई , जिसका परिणाम विगत विधानसभा चुनावों में देखने को मिला . इसलिए अब आने वाला समय बतायेगा कि दुर्ग की राजनीति में राजेंद्र साहू जैसे नामों की क्या राजनैतिक भूमिका रहेगी

राजेंद्र साहू समर्थक क्या कांग्रेस के आगामी लोकसभा प्रत्याशी को जितवायेंगें ?

दुर्ग लोकसभा की एकमात्र विधानसभा सीट कांग्रेस की झोली में आई है , जिसका कारण उक्त युवा नेता का व्यक्तिगत प्रभाव बताया जाता है . उल्लेखनीय है कि जिन विधानसभा क्षेत्रों में तथाकथित तौर पर राजेंद्र साहू जैसे नामों का विशेष दखल था, उसमे कांग्रेस के विधानसभा प्रत्याशियों को कितने मत मिले है , यह चुनाव आयोग की घोषणा के बाद सभी के सामने आ गया है . विचारणीय यह भी है कि भिलाई और पाटन विधानसभा में राजेंद्र साहू की इस बार सक्रियता कितनी थी यह कांग्रेस कार्यकर्ता भलीभांति जानते है इसलिए मान सकते हैं कि राजेंद्र साहू समर्थक भिलाई और पाटन में नहीं है लेकिन दुर्ग शहर, दुर्ग ग्रामीण और वैशाली नगर विधानसभा को तथाकथित तौर पर राजेंद्र साहू का दखल क्षेत्र माना जा सकता है . भूपेश बघेल के कृपा पात्र राजेंद्र साहू को इन विधानसभा क्षेत्रों में मुख्यमंत्री कार्यालय से विशेष महत्व दिए जाने का आरोप कांग्रेस कार्यकर्ता भूपेश बघेल सरकार के समय लगाते थे इसलिए इन्हीं आरोपों के कारण कांग्रेस कार्यकर्ताओं की मनोदशा आगामी लोकसभा चुनावों में कांग्रेस के  अंदरूनी मामलों को नई दिशा देगी .

दुर्ग की सीक्रेट टाई-अप गेमवाली राजनीति का अगला वर्सन होगा लोकसभा चुनाव !

स्व. मोतीलाल वोरा के राजनैतिक वारिस अरुण वोरा को क्या दुर्ग के राजेंद्र साहू जैसे लोग अपना नेता मानते है ? यह प्रश्न कई मायनों में दुर्ग विधानसभा चुनाव परिणाम के साथ स्पष्ट हो गया है . इस महत्वपूर्ण प्रश्न पर कांग्रेस हाई कमान की चुप्पी साधे बैठे रहना , इस बात का संकेत दे रहा है कि आगामी लोकसभा चुनावों में सीक्रेट टाई-अप गेमवाली राजनीति विशेषकर दुर्ग कांग्रेस के अंदरूनी खींचातान में देखने को मिलेगी . इन्हीं अटकलों के साथ यह राजनीतिक विश्लेषण करने में शायद ही दो मत होंगे कि कांग्रेस संगठन में दुर्ग से भेजे गए पदाधिकारियों द्वारा विधानसभा चुनावों में जो भूमिका निभाई गई है उसका खामियाजा दुर्ग कांग्रेस ने विगत विधानसभा चुनावों में असम्मानजनक हार का स्वाद चखकर उठाया है औ.  पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के सबसे करीबी माने जाने वाले राजेंद्र साहू ने दुर्ग ग्रामीण, दुर्ग शहर वैशाली नगर और अहिवारा विधानसभा में जो भूमिका निभाई है उस पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं को विचारमंथन करने का अवसर आगामी लोकसभा चुनावों के बहाने आ गया है ।

कांग्रेस पार्टी को अगर दुर्ग लोकसभा जीतना है तो समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ताओं को महत्व देना पड़ेगा और विशेषकर राजेंद्र साहू जैसे दलबदल कर प्रवेशित लोगों के साथ-साथ विपरीत परिस्थितियों में कांग्रेस का साथ नहीं छोड़ने वाले कार्यकर्ताओं को भी महत्व देना पड़ेगा ।

अमोल मालुसरे,राजनैतिक विश्लेषक एवं समाज सेवक 

 

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