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सूखे की आहट चिंताजनक

रायपुर। राज्य के कुछ जिलों में जहां अल्प वर्षा से खेतों में दरारें पड़ गई हैं, वहीं इस बात से किसानों के माथे पर भी चिंता की लकीरें नजर आ रही हैं। एक तरफ राज्य सरकार ने 28 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया है, वहीं इस हालात से निपटने के लिए सभी कलेक्टरों को फसलों के नुकसान का आकलन करने के निर्देश भी जारी कर दिए हंै। उत्तर छत्तीसगढ़ में अल्प वर्षा के कारण खेती-किसानी पिछड़ गई है।

राज्य की आठ तहसीलों में 40 प्रतिशत से कम वर्षा हुई है। किसान चिंतित हैं। उन्हें इससे उबारने के लिए शासन-प्रशासन को पुख्ता इंतजाम करना चाहिए। इस संबंध में यह भी देखा जाना चाहिए कि किसानों ने अपना फसल बीमा करवाया है या नहीं। अगर किसान बीमा करा चुके हैं तो उन्हें इसका भुगतान समय पर हो, यह भी सुनिश्चित करना सरकार का दायित्व है।

इस सीजन में प्रदेश के बस्तर संभाग के कुछ जिलों में औसत से अधिक वर्षा बारिश हो चुकी है। बीजापुर में रिकार्ड 1,431 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। वहीं अल्प वर्षा से प्रदेश के कोरिया, जशपुर, बेमेतरा, बलरामपुर, रायपुर, सरगुजा जिले में हालत सबसे ज्यादा खराब है। बलरामपुर जिले में अब तक 212 मिली मीटर वर्षा दर्ज की गई है। इसके चलते नदियां सूखने के कगार पर हैं।

यहां के किसान सबसे ज्यादा चिंतित हैं। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि जिन इलाकों में धान की फसल खराब हो चुकी है, वहां किसानों को वैकल्पिक फसलों पर विचार करना चाहिए। जैसे- वह मूंग, उड़द आदि फसलें उगा सकते हैं। हालांकि जहां फसल पीली पड़ गई है, वहां एक पानी देने से वह ठीक हो सकती है। राज्य सरकार ने एक तरफ कई तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया है, लेकिन स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव के विधानसभा क्षेत्र की अल्प वर्षा वाली दो तहसीलों लखनपुर और उदयपुर को सूखाग्रस्त घोषित नहीं किया है।

इस मुद्दे को लेकर राजनीति गरमाने लगी है। क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने नाराजगी व्यक्त की है। सूखा प्रबंधन मैन्युअल के मुताबिक 80 प्रतिशत से कम बारिश होने पर सूखे की स्थिति बनती है। पिछले वर्ष भी प्रदेश के 23 जिलों की 72 तहसीलों में 80 फीसद से कम वर्षा हुई थी।

राज्य के कई जिलों में हर वर्ष सूखे की स्थिति बनती है। ऐसे में सरकार का दायित्व है कि वह सूखे की आशंका के मद्देनजर पहले से ही आकस्मिक योजना बनाकर काम करें, ताकि कर्ज की मार झेल रहे किसानों तक समय रहते मदद उपलब्ध कराई जा सके।

ऐसा बिल्कुल नहीं होना चाहिए कि जब पानी सिर से ऊपर गुजर जाए, तब सरकार जागे और फसलों को हुए नुकसान की रिपोर्ट मंगवाए। इस मुद्दे को लेकर विपक्ष बार-बार सवाल उठाता है, लेकिन हर बार सरकार समय रहते नहीं जागती है। सूखाग्रस्त तहसीलों में सरकार को राहत कार्य तुरंत शुरू करना चाहिए।

मनरेगा सहित दूसरी योजनाओं से ग्रामीणों को रोजगार देने का प्रयास होना चाहिए। वहीं फसल नुकसान का मुआवजा भी जल्द जारी करना चाहिए। पशुओं के चारे और निस्तारी-पेयजल आदि की व्यवस्था भी सरकार को करना चाहिए।

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