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चिकित्सा व्यवसायियों की निरंकुश व्यवसायिक गतिविधियों को प्रदेश का स्वास्थ्य संचालनालय अनदेखा क्यों कर रहा है ?

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग- चिकित्सा व्यवसायियों की निरंकुश व्यवसायिक गतिविधियों को प्रदेश का स्वास्थ्य संचालनालय अनदेखा क्यों कर रहा है ?

क्या स्वास्थ्य संचालनालय यह बताएगा कि आम आदमी के स्वास्थ्य को संरक्षित कौन करवायेगा ?

क्या स्वास्थ्य संचालक प्रदेश के ईमानदार स्वास्थ्य मंत्री की छवि अपनी उदासीन कार्यपद्धति से धूमिल करवायेगा ?

क्या स्वास्थ्य संचालक की गतिविधियों को नजरंदाज करना जनहित के लिए सही है ?

पूरब टाइम्स , भिलाई . छत्तीसगढ़ में पिछली कांग्रेस की सरकार के दिनों, अपने ऊपर अनेक रसूखदारों के वरद हस्त के कारण अनेक चिकित्सा व्यवसाइयों ने अनेक नियम कानूनों की धज्जियां उड़ा कर , अपना काम ज़ारी रखा . कोरोना काल के बाद मध्यम वर्गीय लोगों का चिकित्सा के खर्चों में भारी वृद्धि का एक बड़ा कारण, यह भी है . बड़े प्राइवेट अस्पतालों में अनावश्यक रूप से , अनेक महंगे टेस्ट करवाना आम हो गया है . केवल इतना ही नहीं अनेक रोगों के इलाजों के लिये ,शासन द्वारा निर्धारित जेनेरिक मेडिसिन लिखे जाने की जगह महंगे कॉम्बिनशन लिखे जा रहे हैं .  झोला छाप चिकित्सा व्यवसाइयों ने भी सभी नियमों को धता-बताकर सरे आम काम करने के लिये कमर कस लिया है . सबसे सरलतम तरीक़ा यह रहा कि किसी भी जगह बेसिक दवा बेचने का लाइसेंस लेकर , उस दवा दुकान की आड़ में हर तरह की दवा बेचना और आम जन को झोला-छप चिकित्सा उपलब्ध कराना . जिले में इस पर लगाम लगाने के लिये प्राधिकृत अधिकारी सीएमएचओ कार्यालय है व जांच के लिये जिला खाद्य एवं औषधि विभाग होता है परंतु उसी विभाग का औषधि निरीक्षक ही स्वयं उन्हें लाइसेंस देने के रैकेट का सरगना होता है तो वह स्वयं उनपर कार्यवाही होने से झोलाछाप चिकित्सा व्यवसाइयों को बचाता है .

पूरब टाइम्स की एक खबर .....

क्या कारण है कि छत्तीसगढ़ के हर गली मोहल्ले मे झोला छाप निर्भीक होकर अपना धंधा चला रहे है ?

प्रदेश के प्रत्येक इलाके में ऐसे चिकित्सा व्यवसायियों की उपस्थिति नजर आ जाती है जिनके चिकित्सा व्यवसाय प्रथम दृष्टांत ही नर्सिंग होम एक्ट के स्थापित नियमों का उल्लंघन करते नजर आ जाते है . उल्लेखनीय है कि दुर्ग, रायपुर, बिलासपुर और रायगढ़ मे तो झोला छाप डाक्टर बाकायदा बोर्ड लगाकर अपना चिकित्सा व्यवसाय डंके की चोट पर चला रहे है . इसके साथ - साथ ये झोला छाप डाक्टर विधि द्वारा अधिनियमित शैक्षणिक पात्रता और मानदंड को पूरा नहीं करते है . उल्लेखनीय है कि विधि मान्य शैक्षणिक पात्रता नहीं रखने वाले लोग बिना किसी अधिकृत शैक्षणी डिग्री के चिकित्सा व्यवसाय घोषित तौर पर चला रहे है लेकिन विडंबना है कि स्वास्थ्य विभाग इस मामले में कोई कार्यवाही नहीं कर रहा है 

क्या कारण है कि छत्तीसगढ़ के प्रत्येक शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में दवाई दुकान स्थापित नियमों का उल्लंघन कर रहे है ?

प्रदेश के प्रत्येक इलाकों में दवा व्यवसायियों कि दवाई दुकानें मे दवा व्यवसाय के संचालन गतिविधियों में विधि द्वारा स्थापित नियम कानून को अनदेखा किए जाने के मामले मिल जाएंगे . जिसके कारण जिले के स्वास्थ्य विभाग के साथ - साथ प्रदेश का स्वास्थ्य संचालनालय भी स्वमेव शंकास्पद नजर आने लगा है . इस विषय पर संज्ञान लेने के लिए स्वास्थ्य संचालक स्वमेव संज्ञान लेने के लिए कार्यवाही नहीं कर रहे है. उल्लेखनीय है कि दवाई दुकानों के संचालकों के द्वारा नियमों का उल्लघंन करने की अनदेखी स्वास्थ्य विभाग खुद कर रहा है . ऐसी स्थिति में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष स्तर पर अवैध चिकित्सा व्यवसायियों को भी भरपूर अवसर मिल रहा है और लोक स्वास्थ्य खतरे में नजर आ रहा है

क्या कारण है कि छत्तीसगढ़ में संचालित होने वाले निजी अस्पताल और क्लीनिक स्थापित नियमों का अनुपालन नहीं कर रहे है ?

भारत गणराज्य की लोक तांत्रिक व्यवस्था में लोक स्वास्थ्य को संरक्षित करने की कार्यवाहियों को सुनिश्चित करने के लिए विधान द्वारा कई अधिनियम और नियम स्थापित किए गए है . इनका अनुपालन करके ही हमारे देश मे अस्पताल और क्लीनिक संचालित करने की विधि बाध्यता सभी चिकित्सा व्यवसायियों पर लागू होती है . छत्तीसगढ़ राज्य में भी विधान द्वारा स्थापित नियमों का अनुपालन अनिवार्य है . गौर तलब रहे कि इन नियमों के अनुपालन छत्तीसगढ़ राज्य में सुनिश्चित करने का पदेन कर्तव्य स्वास्थ्य संचालक का है लेकिन विडंबना यह है कि दुर्ग रायपुर बिलासपुर और रायगढ़ जैसे अग्रणी शहरी इलाकों में भी स्वास्थ्य संचालनालय चिकित्सा व्यवसायियों को कानून के दायरे में लाने में विफल नजर आ रहा है और

स्वास्थ्य संचालक की विफलता का संज्ञान कोई भी नहीं ले रहा है .

प्रदेश में चिकित्सा क्षेत्र में हो रही मनमानी पर रोक लगाने के लिये सबसे पहले जिला स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी कार्यालय की होती है . हर शहर और गांव मे चल रहे अविधिक चिकित्सा व्यवसाय  की जानकारी इस कार्यालय को नहीं होगी , ऐसा हो ही नहीं सकता . अब आप स्वयं अंदाज़ लगा सकते हैं कि अविधिक चिकित्सा व्यवसाइयों को इनका संरक्षण प्राप्त होता है

मधुर चितलांग्या ,  प्रधान संपादक , दैनिक पूरब टाइम्स

छत्तीसगढ़ में हर अस्पताल व क्लिनिक द्वारा पूरी तरह से नर्सिंग एक्ट का परिपालन सुनिश्चित किया जाना चाहिये . गलत कामों को अनदेखा करने वाले अधिकारियों को कड़ी सज़ा दी जानी चाहिये . झोला छाप डोक्टर भी अनेक प्राइवेट हॉस्पिटल के एजेंट की तरह काम कर रहे हैं . इस पर भी पूर्णतः लगान लगानी चाहिये

अमोल मालुसरे, समाज सेवक

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