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भारतीय रेल में 'हॉल्ट' किस प्रकार के स्टेशन होते हैं, जंक्शन से कैसे होते हैं अलग? शायद जानते होंगे फर्क

ठंड का मौसम अपने चरम पर है और ट्रेनें लेट होना शुरू हो चुकी हैं. कई ट्रेनें तो 10 घंटे तक लेट हो गईं हैं. जब भी भारतीय रेलवे की बात होती है, तो कई ऐसे रोचक फैक्ट्स की भी बात होती है जो लोगों को हैरान करते हैं. स्टेशनों को लेकर भी कई खास जानकारियां आपको मालूम होंगी, पर क्या आपको स्टेशनों के फर्क के बारे में पता है? हॉल्ट (What is Halt station in Indian Railway) नाम का एक अलग तरह का स्टेशन होता है, जो आपको कम ही जगह पर देखने को मिलता होगा. आज हम आपको बताएंगे कि ये आम जंक्शन से कैसे अलग होते हैं और इनका क्या काम होता है.  हिन्दी की सीरीज अजब-गजब ज्ञान के तहत हम आपके लिए लेकर आते हैं देश दुनिया से जुड़ी ऐसी हैरन करने वाली जानकारियां जो किसी को भी चौंका सकती हैं. आज हम बात करेंगे हॉल्ट स्टेशनों (What is Halt station) के बारे में. दरअसल, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म कोरा पर हाल ही में किसी ने ये सवाल किया है कि हॉल्ट स्टेशन क्या होते हैं? आपने कभी न कभी ऐसे स्टेशन देखे होंगे, तो हम आपको इनके बारे में भी बता देते हैं. पहले जान लीजिए कि लोगों ने क्या उत्तर दिए हैं.कोरा पर लोगों ने क्या दिया जवाब?
अजय कुमार निगम नाम के यूजर ने कहा- “हॉल्ट स्टेशन नॉन ब्लॉक स्टेशन की श्रेणी में शामिल हैं. ये अपेक्षाकृत छोटे स्टेशन हैं जहां ट्रेनों को लाइन क्लियर इत्यादि नहीं दी जाती है. अतः यहां किसी भी प्रकार के सिग्नल नहीं लगाए जाते हैं. जिन सवारी गाड़ियों की समय सारिणी में यहां पर हाल्ट दिया गया होता है उनके लोको पायलट यहां गाड़ियां रोकते हैं और यात्रियों के उतरने एवं चढ़ने के उपरांत ट्रेन के गार्ड से प्रस्थान अनुमति मिलने पर ट्रेन को रवाना करते हैं, और इन्हीं स्टेशनों को हाल्ट स्टेशन कहते हैं.” लक्षमी नारयण अरोड़ा ने कहा- “भारतीय रेलवे में हॉल्ट स्टेशन पर यात्रियों के चढ़ने उतरने की अस्थायी व्यवस्था होती है. इन स्टेशनों का ट्रेन के परिचालन पर कोई कंट्रोल नहीं होता और अधिकतर यह कांट्रैक्टर द्वारा मेंटेन किये जाते हैं. ट्रैन नजदीकी मुख्य स्टेशन के निर्देशों पर यहां रुकती हैं.” सैयद शकील ने कहा- “ये डी क्लास स्टेशन होते हैं जहां संकेतों के स्थान पर एक इंडिकेटर लगा होता है. यहां पर संचालन हेतु स्टेशन मास्टर की आवशयकता नहीं होती. इंजन चालक निर्धारित समय व स्थान पर समय सारिणी अनुसार ट्रेन को संचालित करता है तथा गार्ड के संकेतों पर ट्रेन को रवाना करता है.”जंक्शन और हॉल्ट में क्या होता है फर्क
लोगों ने जो जवाब दिए हैं, वो सही हैं क्योंकि अन्य सोर्सेज में भी हॉल्ट स्टेशन को लेकर यही जवाब दिया गया है. रेल रेस्ट्रो वेबसाइट की रिपोर्ट के अनुसार हॉल्ट स्टेशन वो होते हैं जहां कुछ यात्री गाड़ियां अपने टाइमटेबल के अनुसार रुकती हैं. कई बार उनका रुकना तय नहीं होता है. जब कभी अगले स्टेशन पर लाइन क्लियर नहीं होती है, तब ट्रेनों को हॉल्ट स्टेशन पर खड़ा कर देते हैं. अगर लाइन क्लियर है तो फिर ट्रेनें आगे बढ़ जाती हैं. कुछ ट्रेनों का हॉल्ट स्टेशन पर रुकना तय होता है. इस स्टेशन पर कोई सिग्नल नहीं होता है. दूसरी ओर जंक्शन वो बड़े स्टेशन होते हैं, जहां पर कई जगह की ट्रेनें आती और जाती हैं. वो रेलवे लाइनों को जोड़ने वाले स्टेशन होते हैं. जंक्शन उस स्टेशन को कहते हैं जहां से कम से कम 3 रेल मार्ग निकलते हैं. आसान शब्दों में कहा जाए तो समझ लीजिए कि जब एक स्टेशन पर तीन रेल मार्गों को जोड़ा जाए, तो उसे जंक्शन कहते हैं. जंक्शन शब्द का अर्थ जोड़ने वाला ही होता है. इस स्टेशन पर आने वाली ट्रेनों के लिए कम से कम 2 ट्रेन रूट होते हैं.

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