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किसान ने चुकाया 22 साल की दोस्ती का कर्ज, बैल की मौत पर हिन्दू परंपरा से किया अंतिम संस्कार

बेजुबान जानवर इंसान की भावनाओं को आसानी से समझ लेते हैं. इसलिए वे मनुष्य के मित्र बन जाते हैं. वे इस दोस्ती को आखिरी सांस तक निभाते हैं. ऐसी ही एक घटना जूनागढ़ के विसावदर में भी सामने आई है. विसावदर का एक किसान अपने बैल से बहुत प्यार करता था. यह बैल पिछले 22 सालों से किसान की खेती में मदद कर रहा था. इस प्रकार किसान और बैल के बीच एक अनोखा भावनात्मक रिश्ता बन गया था. इसलिए जब यह बैल मर जाता है, तो किसान उसके अंतिम संस्कार समेत सभी अनुष्ठान करता 

जूनागढ़ के विसावदर तहसील के नवानिया गांव में रहने वाले संजयभाई हीरपरा खेती का व्यवसाय करते हैं. वह अपनी 12 बीघे जमीन पर गौ आधारित खेती कर रहे हैं.

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इसके अलावा उनके पास 12 से ज्यादा मवेशी हैं. वे परिवार के सदस्य की तरह हर जानवर की देखभाल करते हैं. इन जानवरों में उसका एक बैल भी था, जो पिछले 22 वर्षों से खेती में उनका सहयोग कर रहा था.

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इस बैल को संजयभाई ने परिवार के सदस्य की तरह पाला. इसलिए जब बैल मर गया, तो संजयभाई ने परिवार के एक सदस्य का शास्त्रोक्त रीति से अंतिम संस्कार किया, उसे समाधि देकर उत्तरक्रिया सहित सभी क्रियाएं कीं.

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किसी भी परिवार में किसी सदस्य की मृत्यु के बाद जिस तरह 12 दिन बाद उत्तरक्रिया (बारहवीं -स्पिंडी) की जाती है, उसी तरह इस बैल भी की गई.

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संजयभाई हर जानवर को अपने परिवार का सदस्य मानते थे.  इसलिए एक मालिक और घर के सदस्य के रूप में कर्ज चुकाने के लिए, संजयभाई ने अपने बैल की मृत्यु के बाद वैदिक परंपरा के अनुसार बैल का अनुष्ठान किया. जिसमें उन्होंने 1008 बार अग्निहोत्र संस्कार किया और अग्नि में आहुतियां दीं.

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इस मौके पर संजयभाई हीरपारा ने लोकल 18 को बताया कि, ऐसा माना जाता है कि जब किसान खेती करता है तो बैल ही किसान के लिए सब कुछ होता है.

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