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रायपुर

पढ़िए! क्या थे भूपेश बघेल सरकार के निर्णय  जोकि बने बड़ी हार का कारण

छत्तीसगढ़ में अधिकतर लोगों के पूर्वानुमान के विरुद्ध अचानक आये भाजपा के विशाल बहुमत से पूरे देश का मीडिया व सुधिजन अचंभित हैं . इस तरह के अप्रत्याशित परिणाम से लोग अचंभित हैं . आरएसएस व कुछ प्रतिबद्ध भाजपाईयों के अलावा किसी में भी ऐसे परिणाम की आशा  नहीं थी

क्या भूपेश बघेल के आत्म-मुग्धता और अहंकार से भरे आचर के कारण, उनके सहयोगियों को भी हार का स्वाद चखना पड़ा ?

क्या किसानों ने,  कांग्रेस की घोषणाओं को विगत विधानसभा चुनाव जैसा महत्व नहीं दिया   ?

क्या श्रमिकों और नौकरी पेशा लोगों के प्रति कांग्रेस का कड़ा व उपेक्षापूर्ण रवैया हार का कारण बना ?

 पूरब टाइम्स , रायपुर . छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की अप्रत्याशित हार के कारणों का अब सब तरफ विश्लेषण हो रहा है . भूपेश बघेल सरकार के द्वारा लिये गए कई निर्णयों को आम जनता ने स्वीकार नहीं किया तो अनेक के क्रियान्‌वयन के ढंग से जनता में नाराज़गी आ गई . उस सरकार के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के एक-तरफा निर्णय लेने वाली छवि ने भी कांग्रेस को भारी नुकसान पहुंचाया . इस चुनाव परिणाम से यह भी साबित हुआ कि केवल छत्तीसगढ़ की अस्मिता की बात करने और सॉफ्ट हिंदुत्व से अपने को बड़ा हिंदू दिखाने की कोशिश भी भूपेश बघेल की टीम को वोट नहीं दिलवा पाई . पिछले पांच सालों में छत्तीसगढ़ के विकास को ताक में रखकर केवल गरीबों में बंदरबांट की कोशिश व घोषणाओं ने भी आम जनता के मन से इस सरकार का मोह भंग कर दिया .  यूं तो , विस्तृत विश्लेषण में , अनेक महत्वपूर्ण मुद्दे आयेंगे पर आज केवल कुछ बिंदुओं पर पूरब टाइम्स की यह रिपोर्ट ...

धान के समर्थन मूल्य वाला चुनावी मुद्दा कांग्रेस को जीतने का सहारा नहीं बन सका

भूपेश सरकार ने सरकारी खजाना लुटाते हुए किसानों को बहुत बड़ी राजनीतिक रिश्वत दी लेकिन किसान का साथ भूपेश बघेल की सरकार को नहीं मिला क्योंकि किसानों को जो पैसे सरकारी खजाने से मिल रहे थे उन पैसे का उपभोग किसान नहीं कर पा रहे थे । धान खरीदी के शासकीय समर्थन मूल्य का वित्तीय फंदा अप्रत्यक्ष तौर पर किसानों के लिए नुकसानदायक साबित हो रहा था , जिसका अनुभव किसान कर रहे थे लेकिन वित्तीय कार्यवाही प्रक्रिया की जानकारी के आभाव में किसान अपना पक्ष प्रस्तुत नहीं कर पा रहे थे और इसी दबी कुचली अभिव्यक्ति को किसानों ने अपने मताधिकार का प्रयोग करके भूपेश बघेल सरकार को सत्ता विहीन कर दिया है

श्रमिक, नौकरी पेशा और कामगार वर्ग से कांग्रेस की दूरी, “हार में बदली”

भूपेश सरकार के श्रमिक, नौकरी पेशा और कामगार वर्ग के लोगों के लिए कुछ नहीं किया जिसके कारण शहरी वित्तीय गतिविधियों पर निर्भर लोग भूपेश सरकार के कार्यकाल में वित्तीय आभाव का सामना करने को मजबूर हो गए.  जबकि भूपेश बघेल का गुणगान करने वाले अर्थशास्त्री यह झूठा भ्रम बनाते रहे कि किसानों को मिलने वाला पैसा छत्तीसगढ़ के बाजार से होकर श्रमिक, नौकरी पेशा और कामगार वर्ग तक पहुंच रहा है और उनकी आर्थिक स्थिति सुधर रही है . यही झूठी वित्तीय दिलासा भूपेश बघेल सरकार के लिए आत्मघाती साबित हुई .

गरीबों का साथ छत्तीसगढ़ कांग्रेस के पंजा छाप के साथ नहीं आया 

छत्तीसगढ़ के गरीब नागरिकों तक भूपेश सरकार की कोई योजना नहीं पहुंची,  जिसके कारण गरीब मतदाताओं ने भूपेश बघेल के पंजा छाप को अस्वीकृत कर दिया . गौर तलब रहे कि, छत्तीसगढ़ की श्रमिक बस्तियां और झुग्गी झोपड़ी वाला रहवासी क्षेत्र अब साक्षर हो गया है उनकी दैनिक जरुरते भी बढ़ गई है.  मोबाइल इंटरनेट उन्हें जागरूक कर रहा है . ऐसे में भूपेश सरकार चाह कर भी गरीब नागरिकों को गुमराह और बेवकूफ नहीं बना सकती थी इसलिए जब गरीब बस्ती के लोगो ने यह अनुभव किया कि उनके वित्तीय उद्धार के लिए भूपेश बघेल सरकार कुछ नही कर रहीं है तो छत्तीसगढ़ के गरीब लोगों ने भूपेश सरकार को विपक्ष में बिठाने का जनादेश दिया

 

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