• 23-05-2024 08:38:01
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केंद्र सरकार ने संसद का विशेष सत्र बुलाया, वन नेशन, वन इलेक्शन पर होगी चर्चा

 केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के एक दांव से देशभर में वन नेशन, वन इलेक्शन पर चर्चा और बहस शुरू हो गई है। केंद्र सरकार ने 18 से 22 सितम्बर के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाया है और निर्देश दिया है कि संसद सत्र के दौरान सभी बड़े अधिकारी दिल्ली में ही रहें। अमूमन सरकार ऐसे निर्देश किसी बड़ी घटना के संदर्भ में ही देती है। इससे कयास लगाए जा रहे हैं कि केंद्र सरकार आगामी लोकसभा चुनावों के मद्देनजर विपक्षी गठबंधन INDIA को कमजोर करने के लिए बड़ी सियासी चाल चल सकती है। ऐसी सियासी रणनीति में वन नेशन, वन इलेक्शन विपक्षी एकता को तोड़ने में कारगर हो सकती है। 

'वन नेशन, वन इलेक्शन' क्षेत्रीय दलों के लिए क्यों काल?
अगर देश में एक ही समय लोकसभा और विधानसभा के चुनाव होते हैं तो इस बात की गहरी और बड़ी आशंका है कि चुनावों में स्थानीय मुद्दे कमजोर पड़ जाएंगे। आम तौर पर लोकसभा और राज्यों के विधानसभा चुनावों के मुद्दे अलग-अलग होते हैं। लोकसभा चुनावों में जहां राष्ट्रीय मुद्दे हावी रहते हैं, वहीं विधानसभा के चुनावों में स्थानीय मुद्दे और स्थानीय समीकरण काम करते हैं। 

राष्ट्रीय पार्टियां राष्ट्रीय मुद्दे उठाती हैं, जबकि स्थानीय और क्षेत्रीय पार्टियां स्थानीय मुद्दे उठाती हैं। ऐसा भी अक्सर होता है कि एक ही पार्टी के लिए दोनों चुनावों में मुद्दे और चुनावी वादे अलग-अलग होते हैं। ऐसे में यह संभावना है कि एक साथ देशभर में लोकसभा और विधानसभा चुनाव होने से क्षेत्रीय दल स्थानीय मुद्दों को मजबूती से नहीं उठा पाएंगे।

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