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क्या छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल की वार्षिक रिपोर्ट की समीक्षा किसी ने की है ?

छ. ग. पर्यावरण संरक्षण मंडल

क्या छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल की वार्षिक रिपोर्ट की समीक्षा किसी ने की है ?

कई छिपे भेद खोलेगी वार्षिक रिपोर्ट इसलिए इसका सार्वजनिक होना बेहद जरूरी है 

प्राकृतिक संपदा और खनिज पदार्थ को संरक्षित करवाने का आधार वार्षिक रिपोर्ट बनेगी 

पर्यावरण संरक्षण हेतु बनाई जाने वाली कार्य योजनाओं को सही दिशा देगी वार्षिक रिपोर्ट 

पूरब टाइम्स , रायपुर . छ.ग. का पर्यावरण संरक्षण मंडल इन दिनों फिर से अपनी गैर ज़िम्मेदाराना कार्यशैली से चर्चा में है. मंडल के द्वारा अनेक लोकोपहितकारी योजनाएं बनीं गईं थी परंतु उनका क्रियांवयन पूरी तरह से फेल होने लगा है. औद्योगिक मामलों में भी अब मंडल की भूमिका बेहद संदिग्ध हो गई है , खासकर रायपुर के क्षेत्रीय कार्यालय की . इसका मुख्य कारण यह है कि किसी भी तरह की पारदर्शिता इस कार्यालय में नहीं बरती जा रही है . सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारियों को या तो नहीं देना या गलत ढंग से देना प्रचलन में आ गया है . शिकायतों पर कोई कार्यवाही नहीं होती है , ना ही नोटिसों का जवाब दिया जाता है   . दबी ज़ुबान में यह भी बताया यह जाता है कि पर्यावरण के नियमों का उल्लंघन करने वाले लोगों पर अनेक बार कार्यवाही नहीं होने का कारण, मंत्री के बंगले से आए निर्देश होते हैं. पर्यावरण संरक्षण मंडल के द्वारा खतरनाक अपशिष्ठ , म्यूनिसिपल वेस्ट इत्यादि के संपादन की रिपोर्ट , संबंधित क्षेत्रीय कार्यलयों से सही नहीं आती हैं , जिसकी जांच करने की ज़हमत , मुख्य कार्यालय नहीं करता है . केवल इतना ही नहीं उ. नका संकलन कर,   प्रदेश की वार्षिक रिपोर्ट , राष्ट्रीय पर्यावरण संरक्षण मंडल को भेज दिया जाता है. इसा तरह से छ.ग. का पर्यावरण संरक्षण मंडल , राष्ट्र की पर्यावरण संरक्षण की वार्षिक रिपोर्ट के डाटा के संदिग्ध होने का ज़िम्मेदार भी बन रहा है . पूरब टाइम्स की एक रिपोर्ट

 

पर्यावरण संरक्षण के मामले में छत्तीसगढ़ राज्य द्वारा केंद्र सरकार को भेजी गई वार्षिक रिपोर्ट अभी कहां है ?

पर्यावरण संरक्षण हेतु शासन स्तर पर गठित राज्य स्तरीय विशेष आकलन समिति की बैठक में लिए जाने वाले निर्णयों का अनुपालन सुनिश्चित करने वाले छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के मुख्यालय में पदस्थ अधिकारी अपना पदेन कर्तव्य कैसे पूरा कर रहे हैं , यह जानने का अधिकार जन सामान्य को है इसलिए छत्तीसगढ़ राज्य की सीमाओं में पर्यावरण संरक्षण मामले की वस्तुस्थिति क्या है?  इसका स्पष्ट चित्रण करने वाली वार्षिक रिपोर्ट वर्तमान में खोज के विषय रूप में चर्चा में बनी हुई है क्योंकि पर्यावरण संरक्षण और खनिज संपदा का संरक्षण मामल प्रशासनिक और राजनैतिक दोनो  मोर्चों पर प्रश्नांकित हो रहा है.  गौर तलब रहे कि विवाद की स्थिति के चलते कई मामले न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए जाने की राह में है . इनमे से सबसे ज्वलंत मामला में छत्तीसगढ़ के कोल ब्लॉक का मामला है . उल्लेखनीय है कि जब से यह मामला सुर्खियों मे आया है , तब से ऐसे सभी पक्ष जो कोल ब्लॉक मामले में न्यायालयीन प्रकरणों में पक्षकारों के रूप में न्यायालयीन कार्यवाहियों का सामना कर रहें हैं . उनके लिए पर्यावरण संरक्षण मंडल की वार्षिक रिपोर्ट और अन्य दस्तावेज महत्वपूर्ण हो गए हैं  इसलिए अभी पर्यावरण संरक्षण की वार्षिक रिपोर्ट कहां है ? इस अनुत्तरित प्रश्न के जवाब की तलाश में सभी लोग हैं .

छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के क्षेत्रीय कार्यालयों के वार्षिक रिपोर्ट के आंकड़ों में विसंगतियां नहीं है क्या ?

छत्तीसगढ़ राज्य में प्राकृतिक संपदा और खनिज पदार्थ का अथाह भंडार है . इन भंडारों का अनियंत्रित दोहन करने वालों के विरुद्ध कार्यवाही करने का प्राधिकार छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के प्राधिकृत अधिकारियों के पद में निहित है. अतः छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के अधिकारियों की कार्यवाही किस दिशा में अग्रेषित हो रही है, इस पर सभी की नजर स्वाभाविक तौर पर होती है. विगत दिनों कोल ब्लॉक से संबंधित घोटाओं का मामला सुर्खियों में था. जिसके बाद से पर्यावरण मंडल की कार्यवाहियों पर केंद्रीय और प्रदेश स्तरीय नजरें बनी हुई है और सभी को यह जानने की उत्सुकता है कि छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल की वार्षिक रिपोर्ट में कोल ब्लॉक मामले में किन विषयों का उल्लेख है .गौरतलब रहे कि कोल ब्लॉक मामले में छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल कार्यालय की कार्यवाहियां ऐसे दस्तावेजिक प्रमाण है जो इस मामले की जांच कार्यवाही के साथ साथ न्यायालयीन प्रकरणों पर होने वाली कार्यवाहियों में प्रमाणिक दस्तावेजिक साक्ष्य बनेगी और निर्णायक कार्यवाही को विधिक आधार भी देगी .

छत्तीसगढ़ के पर्यावरण संरक्षण मंडल की कागजी कार्यवाहियों में दफन जानकारियां जब बाहर आयेंगी तो क्या होगा ?

वायु प्रदूषण, ठोस कचरे का प्रबंधन, पानी की किल्लत, गिरता भूजल स्तर, जल प्रदूषण, संरक्षण, वनों की गुणवत्ता और संरक्षण की कमी, जैव विविधता के नुकसान और भूमि/मृदा क्षरण भारत में प्रमुख पर्यावरणीय मुद्दे हैं .इसके साथ साथ ये मुद्दे छत्तीसगढ़ को भी अपने भयानक प्रकोप में जकड़ रहें हैं . जिनका समाधान खोजना वर्तमान परिस्थितियों में बेहद ज़रूरी हो गया है क्योंकि पर्यावरण प्रदूषण भारत ही नहीं समूचे विश्व की समस्या है. कल-कारखानों से निकलता काला जहरीला धुआं वायु को प्रदूषित तो कर ही रहा है, वहीं उद्योग से निकलने वाला गंदा पानी नदियों में मिलकर जल को जहरीला बना रहा है. आधुनिकता की अंधी दौड में वृक्षों का तेजी से कटाव हो रहा है, जिसके कारण बेमौसम बारिश तो कहीं अल्प, कहीं अति व अवर्षा की स्थिति निर्मित हो रही है. छत्तीसगढ़ भी इन चिंताजनक समस्याओं का सामना कर रहा है इसलिए जरूरी हो गया है कि छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के दस्तावेजों में दफन जानकारियां में से ऐसी जानकारियों को सार्वजनिक किया जाएं जो कि इन भयावता व्याप्त करने वाली समस्याओं के उत्पन्न होने वाले असल कारण को उजागर करें लेकिन विडंबना यह है कि छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल की कार्यवाहियों से संबंधित दस्तावेज पारदर्शिता के दायरे में आने में अब तक नाकाम नजर आ रहे है 

 

पर्यावरण संरक्षण विषयों की वार्षिक रिपोर्ट कहां है वर्तमान में यह यक्ष प्रश्न अनुत्तरित है इसलिए उम्मीद की जा रहीं है की सदस्य सचिव पर्यावरण संरक्षण मंडल छत्तीसगढ़ अपना पदेन कर्तव्य पूरा करके पर्यावरण संरक्षण सबंधित वार्षिक रिपोर्ट को पब्लिक डोमेन में लाने की व्यवस्था करेंगे 

अमोल मालुसरे ,समाजसेवक और राजनैतिक विश्लेषक

पर्यावरण संरक्षण से संबसंधित अनेक मामले प्रदेश के मुख्य कार्यालय की ढिलाई के कारण ठंडे बस्ते या कोर्ट की पेशियों की बलि चढ़ जाते हैं. अनेक मामलों में नोटिसों के बाद सुधार की जगह कागज़ी खानापूर्ति होना , रसूखदारों व राजनेताओं के हस्तक्षेप होना इंगित करती है

मधुर चितलांग्या, प्रधान संपादक , पूरब टाइम्स

 

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