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दुर्ग-भिलाई समाचार

श्रमिकों के कल्याण के क्या कर रहा है

श्रमिकों के कल्याण के क्या कर रहा है "छत्तीसगढ़"

भिलाई इस्पात संयंत्र के श्रमिकों के अधिकारों को सुनिश्चित करवाने वाला तन्त्र कहां है ?

गैर शासकीय उद्योगों में कार्यरत श्रमिकों के कल्याण और संरक्षण की क्या व्यवस्था है ?

श्रम कानून कार्यान्वयन दायरा शासकीय फाइलो से बाहर स्थापित करने वाले प्राधिकारी कहां है ?

 

विश्व के सबसे बड़े इस्पात संयंत्र में से एक बीएसपी में श्रम कानून अनुपालन स्थिति क्या है ?

.भिलाई इस्पात संयंत्र खतरनाक श्रेणी में आने वाला उद्योग हैं जिसमें खतरनाक औद्योगिक प्रक्रियाओं को करने पर बड़े पैमाने पर इस्पात और अन्य सहउत्पादों का निर्माण किया जाता है उल्लेखनीय है कि वृहद स्तर के इस उत्पादन कार्य में बड़ी संख्या में ठेका श्रमिक भी अपना योगदान देते है लेकिन विडंबना यह है कि इन ठेका श्रमिकों के अधिकारों के संरक्षण के लिए केंद्र और राज्य सरकारों ने जो कानून बनाए गए है उनका अनुपालन भिलाई इस्पात संयंत्र के कार्यस्थल में होता है क्या ? इस प्रश्न पर भिलाई के महापौर और अन्य जन प्रतिनिधि चुप्पी साधे रहते है लेकिन यह मामला अब आने वाले समय में महत्पूर्ण हो जायेगा क्योंकि अब विधानसभा और लोकसभा चुनाव आने वाले है ।

क्या कांग्रेस पार्टी प्रवक्ता कभी इस बात पर वक्तव्य देंगे कि भिलाई और रायपुर में संचालित गैर सरकारी उद्योगों में श्रम कानून का अस्तित्व कितना है ?

.भिलाई और रायपुर में बड़े पैमाने पर औद्योगिक गतिविधियां होती है लेकिन इन गतिविधियों की शासकीय स्तर से कैसे  मॉनिटरिंग की जाती है ? यह प्रश्न हमेशा से अनुत्तरित रहा है क्योंकि श्रम आयुक्त कार्यालय के वेबसाईट पर सुचना का अधिकार अधिनियम की धारा ४ के प्रावधानूसार  वभिन्न शासकीय और गैर शासकीय उद्योगों के कार्यस्थलों से संबंधित श्रम कानून की अनुपालनिय व्यवस्थाओं को सुनिश्चित करने वाली गतिविधियों का ब्यौरा प्रकाशित और प्रसारित नहीं किया गया है और इस मामले में कांग्रेस प्रवक्ता प्रदेश शासन की उपलब्धियों को सर्व साधारण की जानकारी में लाने के लिए कोई विशेष पहल करते भी नजर नहीं आते हैं . जिसके कारण श्रम कानून की अनुपालन सुनिश्चितता के मामले में छत्तीसगढ़ की स्थिति कई अनुत्तरित प्रश्नों में घिरी हुई है 

श्रम कानून के दायरे में औद्योगिक गतिविधियों में लाने वाले प्राधिकारी कर्तव्य निष्ठ है क्या ? 

.छत्तीसगढ़ शासन के संचालनालय, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के अधिकारियों द्वारा अपने-अपने क्षेत्र में स्थित कारखानों का निरीक्षण कर कारखाना अधिनियम एवं अन्य अधिनियमों के प्रावधानों का पालन कराया जाता है तथा निरीक्षण प्रतिवेदन के माध्यम से सुरक्षा के उपाय सुझाये जाते हैं। उल्लेखनीय है कि, छत्तीसगढ़ में स्थापित शासकीय और गैर शासकीय कारखानों में घटित दुर्घटना की सूचना प्राप्त होने पर तत्काल जाँच की जाती है एवं शिकायत प्राप्त होने पर भी इस संचालनालय के द्वारा जाँच की जाती है। शिकायत की जाँच, निरीक्षण एवं दुर्घटना जाँच के उपरान्त उल्लंघन पाए जाने की स्थिति में दोषी कारखाना प्रबंधन के विरूद्ध वैधानिक कार्यवाही भी यही संचालनालय करता है लेकिन विडंबना यह है कि, छत्तीसगढ़ शासन के संचालनालय, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के अधिकारियों द्वारा जो कार्यवाहियां की जाती है वे जन सामान्य की पहुंच में नहीं है , जिसके कारण स्वाभाविक तौर पर इस आशंका को बल मिलता है कि छत्तीसगढ़ शासन का यह संचालनालय गड़बड़ियां कर रहा है और श्रमिक कल्याण अनियमितताओं का शिकार तो नहीं हो रहा है .

 

श्रम कानून के विधि निर्देशों का अनुपालन करना सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारी है क्योंकि श्रमिक अपनी जान जोखिम में डाल कर हमारी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में आधारभूत योगदान देता है . श्रम आयुक्त की प्राधिकृत जिम्मेदारी पूरी करनी चाहिए

अमोल मालुसरे , समाजसेवक और राजनैतिक विश्लेषक

छत्तीसगढ़ में केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित अनेक मानकों का उल्लंघन होना दिख कर आता है. ऊपर से मॉनिटरिंग एजेंसियों द्वारा अपनी जांचों के प्रतिवेदन, मीडिया, वेबसाइट या अन्य माध्यमों से पब्लिक डोमेन में नहीं लाने से उनकी कार्यशैली पर संदेह होता है. मीडिया में आई खबरों व शिकायतों पर भी ध्यान दिया जाता है कि नहीं ? यह भी पता नहीं चलता है

इंजी. मधुर चितलांग्या , संपादक , पूरब टाइम्स

 

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