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दुर्ग-भिलाई समाचार

छत्तीसगढ़ में अत्यधिक खतरनाक श्रेणी के कारखानों की निगरानी

औद्योगिक सुरक्षा विभाग व पर्यावरण संरक्षण विभाग

छत्तीसगढ़ में अत्यधिक खतरनाक श्रेणी के कारखानों की निगरानी 

कौन करता है ?

कैसे करते है ?

कब करता है ?

पूरब टाइम्स रायपुर , छत्तीसगढ़ में केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित अनेक मानकों का उल्लंघन होना दिख कर आता है ,  जिसका कारण है औद्योगिक प्रदूषण के दुष्परिणाम का दिखाई देना . एक तरफ भिलाई के छावनी क्षेत्र में केड़िया डिस्टलरी व अन्य केमिकल फैक्ट्री के आस-पास के बोरिंग से , मानव उपयोग के लिये हानिकारक , केमिकल युक्त पानी निकलता है वहीं दूसरी तरफ टाटीबंद क्षेत्र के घरों की छतोंमें रोज़ सुबह धुंए के कारण जमी काली धूल का दिखाई देती है . पता नहीं क्यों , अपनी उपलब्धियों का दावा करने वाले संबंधित विभाग धृतराष्ट्र बने बैठे हैं. बात केवल यहां तक नहीं हैं , कुछ उद्योगों को अत्याधिक खतरनाक श्रेणी में रखा गया है , जिनसे मानव समाज को भारी खतरा है . उन उद्योंगों के द्वारा होने वाले खतरे के कारण , उनकी कार्यशैली को कानून के अनुसार , निगरानी करने का दायित्व किस विभाग के उठाया जाता है यह पब्लिक डोमेन में नहीं है . एक्सीडेंट के बाद औद्योगिक सुरक्षा विभाग अपनी मुस्तैदी दिखाने में कोई कोर-कसर छोड़ते नहीं दिखता है पर समय समय पर दिखने वाले छोटे छोटे संकेतों की निगरानी व निवारक उपाय कौन करता है , कैसे करता है , कब करता है , यह प्रश्न अनुत्तरित है क्योंकि यह आम जनता की जानकारी में नहीं है . आम जनता को यह भी पता नहीं है कि छोटी-छोटी असुरक्षा की निगरानी नहीं करने पर किसको ज़िम्मेदार ठहराएं ? पूरब टाइम्स की एक रिपोर्ट .

छत्तीसगढ़ में कुल 19 कारखानें अत्यधिक खतरनाक श्रेणी के है ?

छत्तीसगढ़ में स्थापित निर्माणियों में से MSIHC Rules 1989 के अंतर्गत् अत्यधिक खतरनाक श्रेणी के कारखानों को पृथक से चिन्हांकित किया गया है। वर्तमान में अत्यधिक खतरनाक श्रेणी के कुल 19 कारखानें हैं। अत्यधिक खतरनाक श्रेणी के कारखाने प्रदेश के विभिन्न 04 जिलों में स्थित है। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के अंतर्गत् बनाए गए नियमों में ऐसे प्रत्येक जिले का आँफ साइट इमरजेंसी प्लान भी बनाया जाना आवश्यक है। 02 जिलों क्रमशः बिलासपुर, जांजगीर-चांपा में ऑफ साइट इमरजेंसी प्लान बन गए हैं तथा दुर्ग एवं रायपुर का आँफसाईट प्लान संबंधित जिला कलेक्टरो को प्रस्तुत किये जा चुके है। रायगढ़ का आँफ साईट प्लान्ट बनाया जाना है।

अत्यधिक खतरनाक श्रेणी के कारखानों की सूची

रायपुर में - 1 मोहनी  इंडस्ट्रीज 9-ए इंडस्ट्रीयल, एरिया, रावांभाठा रायपुर  2 प्रकृति इंडस्ट्रीज प्लाट नं. 9-बी रावांभाठा इंडस्ट्रीयल एरिया, रायपुर 3 अम्बाटूर पेट्रोकेम लिमिटेड, प्लाट नं. 17 एवं 19, रावांभाठा इंडस्ट्रीयल एरिया, रायपुर 4 हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड, एल.पी.जी.बाटलिंग प्लांट, मंदिर हसौद, रायपुर 5 प्राची रेजीन्स प्राईवेट लिमिटेड, ग्राम-धरमपुरा, माना रोड़, रायपुर 6 श्री गणेश ओलियोचेम, सिलतरा, रायपुर 7 श्री केमिकल्स, सिलतरा, रायपुर 8 इंडियन आईल कार्पोरेशन लिमिटेड, एल.पी.जी.बाटलिंग प्लांट, सिलतरा, फेस-।, रायपुर 9 एरो एग्रो केमिकल्स,इंडस्ट्रीज लिमिटेड,भनपुरी इंडस्ट्रीयल एरिया,रायपुर 10 आकृति टेक्जिम प्राईवेट लिमिटेड, सिलतरा ग्रोथ सेन्टर, रायपुर 11 ठाकुर पेट्रो केमिकल्स, ग्राम-उरला, अभनपुर, रायपुर 12 अनिकेत एल.पी.जी. बाटलिंग, सिलतरा फेस-।।, रायपुर, जांजगीर-चांपा में – 13  मध्य भारत पेपर मिल ग्राम बिरगहनी, चांपा, दुर्ग में – 14 ऑक्सीजन प्लान्ट ।।, बी.एस.पी.भिलाई 15 कोल केमिकल्स डिपार्टमेन्ट, बी.एस.पी.भिलाई 16 इनर्जी मेनेजमेन्ट डिपार्टमेन्ट, बी.एस.पी.भिलाई 17 प्रोपेन स्टोरेज, बी.एस.पी.भिलाई 18 पे्रक्स एयर इंडिया प्राईवेट लिमिटेड, बी.एस.पी.भिलाई,रायगढ़ – 19 जिन्दल पॉवर लिमि0 तमनार, रायगढ़

अत्यधिक खतरनाक श्रेणी के कारखानों के खतरों से जन स्वास्थ्य को संरक्षित करता नियम

.परिसंकटमय रसायनों का विनिर्माण, भण्डारण और प्रायात नियम, 1989 के नियम 17 के  प्रवधानानुसार जानकारी का संग्रहण, विकास और प्रसारण नियम बनाए गए है जिसके अनुसार ( नियम 1 ) यह नियम किसी ऐसे औद्यागिक क्रियाकलाप को लागू होगा जिसने ऐसा परिसंकटमय रसायन जो अनुसूची 1 के भाग 1 में प्रषिकथित किसी मानवण्ड की तुष्टि करता है और इस अनुसूची के भाग 2 के स्तम्भ 2 में सूचीबद्ध है, अन्तर्वसित है या अन्तर्वसित हो सकता है ।( नियम 2 ) अधिष्ठाता जिसका इस नियम के उपनियम के आधार पर किसी औद्योगिक क्रियाकलाप पर नियंत्रण है, अनुसूची 9 में विनिविष्ट सुरक्षा आंकड़ा शीट के प्रारूप में जानकारी प्राप्त करेगा या उसका विकास करेगा यह जानकारी अनुरोध पर निर्देश के लिए सुलभ होगी।(नियम 3) अधिष्ठाता अपने द्वारा हटाए गए किसी परिसंकटमय रसायन की भावत अनुसूची 9 में विनिविष्ट को रक्षा का शोट को प्राप्त करने या उसका विकास करते समय यह सुनिश्चित करेगा कि जानकारी सही ढंग से अभिलिखित की गई और परिसंकट का अवधारण करते समय प्रयुक्त वैज्ञानिक साक्ष्य परिलक्षित करेगा। यदि किसी रसायन के परिसंकट की बाबत कोई महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध है तो वह यथाशक्य शीघ्र अनुसूची 9 में विनिर्दिष्ट तात्विक सुरक्षा शीट में जोड़ी जाएगी। ( नियम 4) परिसंकटमय रसायन के प्रत्येक प्राधान पर स्पष्ट रूप से लेबल लगाया जाएगा या उसे निम्नलिखित को पहचान करने के लिए चिह्नित किया जाएगा --( क ) रसायन की अंतररवस्तु (ख) परिसंकटमय रसायन के विनिर्माता या आयातकर्ता का नाम मौर पता; (ग) मानदंड के अनुसार भौतिक, रासायनिक और विषालुप्ता संबंधी किड़े और( नियम 5 ) इस नियम के उपनियम 4 के आधार पर जहां रसायन के प्रकार या पैकेज की प्रकृति की दृष्टि से किसी रसायन पर लेबल लगाना व्यावहारिक नहीं है, यहां दस्तावेजों को बांधने या जोड़ने जैसे अन्य प्रभावित्त साधनों के लिए उपबंध किया जाना चाहिए

आँफ साइट इमरजेंसी प्लान क्या वास्तविकता के धरातल पर खरा उतरेगा 

.प्रदेश में विभिन्न जिलों में स्थापित खतरनाक श्रेणी के कारखानों में कारखाना अधिनियम के प्रावधानों का पालन सजगता से कराया जाता है। इन कारखानों में उपयोग किये जा रहे रसायनों से आपात स्थिति निर्मित होने की आशंका रहती है। खतरनाक श्रेणी के कारखानों में होने वाली विनिर्माण प्रक्रिया से तथा इनमें उपयोग हो रहे रसायनों से श्रमिक के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित हो, इस बाबत् इन कारखानों में ऑन साइट इमरजेंसी प्लान बनवाए जाते हैं। इन कारखानों में बनाए गए ऑन साइट इमरजेंसी प्लान का रिहर्सल भी कराया जाता है, जिससे इन प्लान की प्रभावी क्रियान्वयन की स्थिति का आंकलन होता रहें परन्तु जन सामान्य को ऐसे खतरों से बचाने के लिए आँफ साइट इमरजेंसी प्लान बनाया जाता है लेकिन क्या छत्तीसगढ़ शासन का संचालनालय औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा द्वारा जन सामान्य की सुरक्षा खतरनाक उद्योगों के कारण घटित होने वाली दुर्घटाओं से बचाव करवाने की कार्यवाहियों की सुनिश्चितता करने की कार्यवाही क्या वास्तविकता के धरातल पर खरी उतरेगी ?

उद्योग हमारी आर्थिक स्थिति के लिए आवश्यक है लेकिन औद्योगिक दुर्घटनाए खतरनाक भी साबित होती है इसलिए आवश्यक है कि खतरनाक उद्योगों का निरीक्षण प्रतिवेदन सार्वजनिक पहुंच में होना चाहिए और सर्व साधारण को इसके समीक्षा का अवसर दिया जाना चाहिए

अमोल मालुसरे ,समाजसेवक और राजनैतिक विश्लेषक

 

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