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छत्तीसगढ

शिक्षा एकमात्र माध्यम जिससे व्यक्ति का विकास संभव हैः मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

रायपुर। हम अपनी संस्कृति को सहेजते हुए और परंपराओं का सम्मान करते हुए आगे बढ़ रहे हैं और शिक्षा ही एकमात्र माध्यम है जिससे व्यक्ति का विकास संभव है। ये बातें मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने आज राजधानी रायपुर के शहीद स्मारक भवन में आयोजित प्रांतीय आर्य महासम्मेलन एवं ज्ञान ज्योति पर्व कार्यक्रम में कही। मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल ने कहा कि स्वामी दयानंद सरस्वती ने जिस आंदोलन की शुरूआत की थी हमें आज उसका परिणाम देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वामी दयानंद सरस्वती ने महिलाओं को शिक्षित करने के लिए आवाज उठायी थी और इसी का परिणाम है कि छत्तीसगढ़ के कालेजों में पुरूषों से ज्यादा संख्या महिला विद्यार्थियों की है।

मुख्यमंत्री ने महर्षि स्वामी दयानंद सरस्वती जी की 200वीं जयंती और आर्य समाज के 150वें स्थापना दिवस  पर स्वामी दयानंद सरस्वती जी और तुलाराम आर्य परगनिहा जी को नमन करते हुए ज्ञान ज्योति पर्व मनाने के लिए सभी को बधाई दी। श्री बघेल ने छत्तीसगढ़ में आर्य समाज के संस्थापक और महान दानवीर तुलाराम आर्य परगनिहा जी के प्राकट्य दिवस पर उनका स्मरण करते कहा कि श्रद्धेय तुलाराम आर्य जी ने छत्तीसगढ़ में स्थानीय स्तर पर समाज सुधार की दिशा में सराहनीय प्रयास किए हैं हम उन्हें उनकी दानशीलता के लिए भी याद करते हैं।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि किसी भी समाज के विकास की प्रक्रिया बहुत लंबी और बहुत जटिल होती है और एक उन्नत समाज को आकार लेने में सदियां लग जाती हैं। नये विचारों की स्थापना और पुराने विचारों के संशोधन-परिमार्जन से ही समाज प्रगतिशील होता है, उसके वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास होता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा भारतीय समाज एक प्रगतिशील समाज है क्योंकि हमने हमेशा ही नये विचारों का स्वागत किया है। हम जिसे सनातन परंपरा कहते हैं, वह अनादि-काल से चली आ रही है, वह अनंतकाल तक चलती रहेगी।

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