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तापमान बढ़ने से कुत्तों को ज्यादा गुस्सा आता है:डॉक्टर्स बोले- गर्मियों के मौसम में डॉग बाइट के मामले 11% बढ़ जाते हैं

नई रिसर्च में खुलासा हुआ है कि गर्मियों के मौसम में कुत्तों को काफी ज्यादा गुस्सा आता है। डॉग बाइट के मामलों में भी इजाफा होता है। डॉक्टर्स के मुताबिक, ठंड और मानसून के मौसम की तुलना में डॉग बाइट के मामले गर्मियों में 11% बढ़ जाते हैं।इसी तरह गर्मी का असर इंसानों पर भी होता है। उन्हें झुंझलाहट होती है। अमेरिका में एरिजोना रिसर्च सेंटर की एक स्टडी में देखा गया कि हाई टेम्परेचर की वजह से लोग गुस्सा हो जाते हैं और एक दूसरे से झगड़े करते हैं।अमेरिका की दूसरी रिसर्च में पाया गया कि टेम्परेचर बढ़ने से हिंसा 4% और सामूहिक हिंसा में 14% तक बढ़ोतरी हुई है। वहीं, स्पेन में सड़क दुर्घटनाओं का खतरा 7.7% तक बढ़ गया है।डॉग बाइट के सबसे कम मामले मानसून के मौसम में सामने आते हैं।

डॉग बाइट रेट और डेली टेम्परेचर लेवल पर स्टडी हुई
रिसर्चर्स ने डॉग बाइट रेट और हर दिन के तापमान के बीच संबंध जानने के लिए इन पर स्टडी की। इसमें पाया की जब सूर्य की किरणें या अल्ट्रावायलेट रे का लेवल ज्यादा था तब डॉग बाइट के मामले बढ़े। रिसर्च में डॉग ब्रीड का जिक्र नहीं किया गया। यानी कौन सी प्रजाति के कुत्तों पर गर्मी का असर ज्यादा हुआ, इस बारे में जानकारी नहीं दी गई। डॉग एग्रेशन के बारे में भी नहीं बताया गया।

69 हजार से ज्यादा डॉग अटैक पर हुई रिसर्च
अमेरिका के 8 शहरों- डलास, ह्यूस्टन, बाल्टीमोर, बैटन रूज, शिकागो, लुइसविले, लॉस एंजिल्स और न्यूयॉर्क में 2009 से 2018 के बीच हुए कुत्तों के हमलों पर रिसर्च हुई। इन मामलों की संख्या करीब 69,525 थी। यानी एक दिन में 3 मामले सामने आए। रिसर्च के मुताबिक, सिर्फ कुत्ते ही नहीं बल्कि टेम्परेचर के बढ़ते ही बंदर और चूहों को भी गुस्सा आता है।

अब जानिए इंसानों को गर्मी में ज्यादा गुस्सा क्यों आता है?
डॉक्टर्स का कहना है कि गर्मी में इंसानों के शरीर का स्ट्रेस हॉर्मोन बढ़ने लगता है। स्ट्रेस हॉर्मोन को कॉर्टिसोल भी कहते हैं। ठंड में कॉर्टिसोल का लेवल कम रहता है, लेकिन जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती है, वैसे-वैसे कॉर्टिसोल का लेवल भी शरीर में बढ़ने लगता है। इससे शरीर को नुकसान पहुंचता है।सरल भाषा में समझें– गर्मी का असर मस्‍तिष्‍क पर पड़ता है। द‍िमाग को जब पर्याप्‍त ऑक्‍सीजन और हाइड्रेशन नहीं म‍िलता तो वो र‍िएक्‍ट करता है और नतीजन हमें ड‍िप्रेशन, तनाव, गुस्‍से का अहसास होता है।

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