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माता-पिता का साइंस से जुड़ाव बच्चों को इसमें करियर बनाने के लिए मोटिवेट होते हैं

वैज्ञानिक माता-पिता अपने बच्चों के आदर्श हो सकते हैं और उन्हें पढ़ाई के अलावा साइंस से जुड़ी गतिविधियों के जरिए जल्द एक्सपोजर दे सकते हैं। उनके बच्चों की साइंस में डिग्री लेने की संभावना तुलनात्मक रूप से दोगुनी है, उन माता-पिता से जिनके पास अन्य विषयों में डिग्री है। आम बच्चों की तुलना में पहले मिलने वाला यह एक्सपोजर बच्चों को साइंस-रिसर्च में करियर बनाने और व्यस्तता के बीच पारिवारिक जीवन संतुलित करने के लिए प्रेरित करता है।

पढ़िए, माता-पिता से प्रेरणा लेकर इस क्षेत्र में सफल होने वाले तीन विशेषज्ञों की कहानियां...

  • सबक- आम लोगों की जिंदगी आसान बनाने में साइंस का बेहतर इस्तेमाल जॉर्जिया इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर मार्क प्रूस्निट्ज कहते हैं- मेरे पिता जॉन केमिकल इंजीनियर रहे, अब मानद् प्रोफेसर हैं। उन्हीं से बहन और मुझे प्रेरणा मिली कि विज्ञान में करियर बेहतर होगा। डिनर टेबल पर भी लोगों के जीवन में विज्ञान के कारण खुशियों पर चर्चा होती थी। बचपन के इसी माहौल के कारण बहन हेल्थ केयर रिसर्चर बन गई और मैं पिता की तरह केमिकल इंजीनियर बना। मेरी रिसर्च का फोकस सरल, कम लागत वाले समाधानों के जरिए दवा वितरण और अन्य मेडिकल सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए टेक्नोलॉजी इसके अनुरूप बनाना है। जिससे यह मरीजों को आसानी से मिल सके। यह सबक मुझे पिता से ही मिला। उनका पूरा काम मानविकी के लिए विज्ञान पर आधारित रहा।
  • नसीहत- बच्चों को पूरी आजादी दें, उनके फैसलों का समर्थन करें

एम्सटर्डम यूनिवर्सिटी के रिसर्च असिस्टेंट लोते डी विंडे कहते हैं- मेरे पिता हान विंडे नीदरलैंड्स की लीडेन यूनिवर्सिटी में जैव प्रौद्योगिकी के रिसर्चर हैं। मां भी पीडियाट्रिक नर्स हैं। मेरे जन्म के वक्त वो पीएचडी कर रहे थे। छुटि्टयों में पिता के साथ मैं उनकी लैब जाता था। मैंने वहां मेडिकल साइंस से जुड़े कार्यक्रमों और गतिविधियों में हिस्सा लिया करता था। ग्रेजुएशन के दौरान प्रतिरक्षा प्रणाली में रुचि जगी। मैं समझना चाहता था कि जो व्यवस्था हमें स्वस्थ रखने के लिए बनी है, वह कैंसर को मिटाने में क्यों विफल हो रही है। नतीजतन मैं अब लिम्फोमा की स्टडी कर रहा हूं। अब मेरी बेटी भी समान करियर चुनती है, तो मैं सपोर्ट करूंगा। आखिर मुझे भी तो परिवार से ही सपोर्ट मिला।

  • सीख- अनुशासित रहें, जीवन में वही चुनें जो आपके लिए मायने रखता है

सिंगापुर नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर वेलेरी यांग कहते हैं- पिता जोसेफ और मां थेरेसा डॉक्टर थे, इसलिए डॉक्टर बनना स्वाभाविक करियर निर्णय था। हालांकि पिता अक्सर मुझे चिकित्सा पद्धति की सीमाओं के किस्से सुनाकर साइंटिफिक रिसर्च के लिए प्रोत्साहित करते थे। उनकी सलाह पर कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में ऑन्कोलॉजी में पीएचडी रिसर्च शुरू की। फिर मुझे बेटा हुआ तो रिसर्च को विराम देना पड़ा। अस्पताल में भी सुबह 5 से रात 11 बजे तक रहना पड़ता था। तब छह माह की अवैतनिक छुट्टी ली ताकि बेटे के साथ समय बिता सकूं। मातृत्व ने मुझे अपने काम में अनुशासित होना और उन प्रोजेक्ट्स के लिए समर्पित होना सिखाया है, जो वास्तव में मेरे लिए सबसे ज्यादा मायने रखते हैं।

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