• 19-04-2024 17:47:57
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छत्ता तोड़ने पर कम समय में फिर बना लेती हैं, डिजाइन और पैटर्न हर बार समान

एक रिसर्च में सामने आया है कि मधुमक्खियों में बहुत खराब मौसम और झटकों के बीच भी अपनी कॉलोनियों को बनाने, मरम्मत करने और उन्हें शिफ्ट करने की अद्भुत क्षमता होती है।अमेरिका की ऑबर्न यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने मधुमक्खी के छत्ते बनाने का तरीके को स्टडी किया। रिसर्चर्स ने पाया कि मधुमक्खियां थ्री-डी नेस्ट बनाती हैं। मधुमक्खियां अंडाकार ब्लॉक बनाती हैं, जिससे पूरे छत्ते का निर्माण होता है। ये ब्लॉक छत्ते में सभी दिशाओं तक फैले होते हैं।छत्तों की ये बनावट कितनी अहम है, इसे समझने के लिए रिसर्चर्स ने मधुमक्खियों के एक छत्ते को तोड़ दिया। इसे मधुमक्खियों को फर्क नहीं पड़ा। स्टडी में कहा गया कि मधुमक्खियों ने साथ मिलकर जल्द नया नेस्ट बना लिया। इनके ब्लॉक, वजन, तापमान सबकुछ पुराने छत्ते जैसा ही था।रिसर्चर्स ने बार-बार मधुमक्खियों के कई छत्तों को तोड़ा लेकिन हर बार मधुमक्खियों ने कम समय में नए छत्ते बना लिए। पुराने और नए छत्तों में कोई फर्क भी नहीं दिखाई दिया।

गणितीय दिमाग लगाकर छत्ता बनाती हैं मधुमक्खियां
रिसर्चर्स ने टेट्रागोन्युला मधुमक्खियों का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा- टेट्रागोन्युला मधुमक्खियों का छत्ता 3D तस्वीर जैसा दिखता है। यह मधुमक्खी मैथमेटिकल ब्लूप्रिंट को फॉलो करती हैं। यह खास तरह का पैटर्न होता है जो आकार में गोल होता है। छत्ता बनते-बनते एक घुमावदार आकार में तैयार हो जाता है। यह रिसर्च ब्रिटेन की कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी और स्पेन की ग्रेनाडा यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने मिलकर की है।ये मधुमक्खियां ऐसा छत्ता तैयार करती हैं जो दिखने में मल्टी-स्टोरी कार पार्किंग जैसा दिखता है। ये इसे तैयार करते समय खास तरह का गणितीय फॉर्मूले का पालन करती हैं। टेट्रागोन्युला मधुमक्खी अपना छत्ता चार तरह के आकार में बनाती है। पहला घुमावदार, दूसरा बुल्स-आई के आकार का और तीसरा डबल स्पाइरल यानी दोहरा घुमावदार होता है। वहीं, छत्ते का चौथा आकार सीढ़ीदार खेत जैसा दिखता है।

मधुमक्खियों की दिनचर्या पर भी हो चुकी है रिसर्च
इजराइल के हिब्रू विश्वविद्यालय की रिसर्च में कहा गया कि मादा मधुमक्खियां बहुत कम नींद ले पाती हैं। छत्ते में मौजूद अंडों की देखरेख के लिए मादा मधुमक्खियां को अपनी नींद की कुर्बानी देनी पड़ती है, जबकि नर मधुमक्खियां अपनी दिनचर्या में कोई बदलाव नहीं करतीं।रिसर्चर्स ने अंडों और मधुमक्खियों की दिनचर्या की बारीकी से जांच की थी। इसमें पाया गया था कि जिस लार्वा में अंडे पनप रहे होते हैं उससे एक रसायन उत्पन्न होता है जो मधुमक्खियों की नींद को कम करता है। अगर इस लार्वा को मधुमक्खियों से अलग कर दिया जाए, तो वे आम दिनों की तरह ही नींद लेती हैं।

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