• 29-05-2024 20:02:56
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शहरों की यूनिट सूडा के अंडर में:नगरों, गांवों में मोबाइल इलाज करने वाली एक जैसी गाड़ियां शहरी यूनिट का खर्च 7 लाख रुपए मासिक

छत्तीसगढ़ में ग्रामीण और शहरी, दोनों तरह के क्षेत्रों में दो अलग-अलग योजनाओं के जरिए इलाज करने वाली मोबाइल मेडिकल यूनिट (एमएमयू गाड़ियां) चलाई जा रही हैं। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में खुलासा हुआ कि शासन के फोकस एरिया यानी ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य विभाग हाट बाजार क्लीनिक के नाम से एमएमयू चला रहा है। प्रत्येक गाड़ी पर हर माह औसतन 1.80 लाख रुपए खर्च किए जा रहे हैं। ऐसी ही गाड़ियां शहरी विकास प्राधिकरण (सूडा) स्लम स्वास्थ्य योजना के तहत शहरों में चला रहा है। लेकिन हर शहरी गाड़ी पर मासिक 5 से 7 लाख रुपए तक खर्च किए जा रहे हैं। खर्च का यह अंतर क्यों है, भास्कर ने इसकी पड़ताल की तो चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि शहरी इलाकों में सूडा ने मोबाइल मेडिकल यूनिट का काम प्राइवेट फर्मों को टेंडर से सौंप दिया है। हर जिले में अलग-अलग टेंडर निकाले गए। इसी वजह से ग्रामीण मेडिकल यूनिट की तुलना में शहरी यूनिट पर तकरीबन चार गुना पैसे खर्च किए जा रहे हैं। यह अंतर किस आधार पर पैदा किया जा रहा है, इसकी वजह भी हैरान करनेवाली है। शहरी और ग्रामीण इलाकों के एमएमयू में सिर्फ वाहन का फर्क है। इसी वाहन की आड़ में इस पूरी गड़बड़ी को अंजाम दिया जा रहा है। शहरों में छोटी बसों का इस्तेमाल होता है तो ग्रामीण इलाकों में ट्रैवलर वैन में ही यह यूनिट चल रही है। लैपटॉप और लैब को छोड़कर बाकी सभी सुविधाएं दोनों के लिए एक जैसी है।

बड़ा सवाल: हर जिले का अलग टेंडर क्यों?
छत्तीसगढ़ में स्लम स्वास्थ्य योजना के तहत 33 नगरीय निकायों में संचालित इस योजना में केवल 2 फर्माें को काम सौंपा गया है। यही इस योजना की गड़बड़ी की ओर इशारा करता है। टेंडर की प्रक्रिया में भी स्वास्थ्य विभाग नदारद रहा है। टेंडर की प्रक्रिया जिले की अर्बन पब्लिक सोसायटी के जरिए कराया गया। जबकि प्रदेश स्तर पर टेंडर निकाला जाना था। करोड़ों रुपए की इस योजना में स्वास्थ्य विभाग के बजाए पूरा काम जिला स्तर पर हो रहा है। इस पूरे मामले में कई सवाल खड़े हो रहे हैं कि किसी भी विभाग में टेंडर की प्रक्रिया सचिव स्तर पर होती है जबकि इस यूनिट में पूरी प्रक्रिया का संचालन जिला स्तर पर किया जा रहा है।

शहरी योजना में स्वास्थ्य विभाग ही नहीं
लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ी इस योजना के टेंडर और संचालन प्रक्रिया में प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग ही नदारद रहा है। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से किए जाने वाले काम को जिला प्रशासन और नगरीय प्रशासन कर रहा है। प्रदेश में शहरी क्षेत्र में 120 वाहन चल रहे हैं। तो वहीं ग्रामीण क्षेत्र में 30 वाहन ही उपलब्ध हैं।

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