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प्रकृति को हमारी नहीं, हमें प्रकृति के साथ की जरूरत:जानिए वो कौन-से उपहार हैं जिन्हें बचाना हमारे हाथ में

प्रकृति को हमारी जरूरत नहीं है। हमें प्रकृति के साथ की जरूरत है। हमारे पास सिर्फ एक दुनिया है… जिसे भविष्य के लिए बचाकर रखना है जानिए प्रकृति के वो कौन-से उपहार हैं जिन्हें बचाना हमारे हाथ में है, यह क्यों जरूरी है और हम इसे कैसे कर सकते हैं...इंसान की गतिविधियों के कारण पर्यावरण में कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन जैसी ग्रीनहाउस गैसें बढ़ती जा रही हैं। इससे तापमान में वृद्धि हो रही है। ग्लेशियर्स में बर्फ पिघल रही है, समुद्र का जल स्तर बढ़ रहा है। साथ ही अभूतपूर्व मौसमी घटनाएं भी हो रही हैं। सबसे बड़ी बात यह कि इससे हमारे इकोसिस्टम में बदलाव आ रहा है।लेकिन इन स्थितियों को सुधारा भी जा सकता है। जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों को अपनाना होगा। जंगलों को कटने से रोकना होगा और सस्टेनेबल एग्रीकल्चर की ओर बढ़ना होगा। सभी के पास अभी अवसर है कि हम प्रकृति के दिए उपहारों के लिए उसे धन्यवाद कहें। व्यावहारिक तरीका है संसाधनों को बचाना और उनका सही इस्तेमाल करना।

1) फोन रिसाइकिल कीजिए क्योंकि 2 हजार मीट्रिक टन कम खनन होगा

2022 में दुनिया में 53 लाख मोबाइल ई-वेस्ट के रूप में फेंक दिए गए। अभी दुनिया में ई-वेस्ट का केवल 17% ही रिसाइकिल हो पाता है। जो फोन रिसाइकल किए जाते हैं, उनमें से गोल्ड और कॉपर जैसे तत्व फिर से इस्तेमाल किए जा सकते हैं। एपल ने अनुमान लगाया है कि एक मीट्रिक टन आइफोन में से सामग्री रिसाइकिल की जाए तो धरती से 2000 मीट्रिक टन रॉ मटीरियल कम खनन करना पड़ेगा।

फायदा : आपके ई वेस्ट से विंड एनर्जी टर्बाइन, इलेक्ट्रिक कार बैटरी या सौर पैनल जैसे उपकरण बनते हैं। जो धरती को हराभरा रखने के लिए अच्छे हैं।

2) कम्पोस्ट में मदद करें क्योंकि इससे रासायनिक उर्वरकों का उपयोग घटेगा

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) के खाद्य अपशिष्ट सूचकांक के अनुसार हर साल दुनिया भर में 130 अरब टन भोजन या तो नष्ट हो जाता है या बर्बाद हो जाता है। ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में फूड वेस्ट का हिस्सा 8 से 10 प्रतिशत है। अगर हम घरों से निकलने वाले कचरे को कम्पोस्ट में बदल सकें तो रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी। मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी।

फायदा: कम्पोस्ट खाद नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, ऑइल और कीटनाशकों जैसे प्रदूषकों को रोककर भूमि और पानी की गुणवत्ता को सुधारती है।

3) ऑर्गेनिक अपनाइए क्योंकि इसमें 50% तक कम ऊर्जा खर्च होती है

रासायनिक खेती पूरे इकोसिस्टम को प्रभावित कर रही है। भूमि से लेकर पानी तक दूषित हो रहा है। इसमें इस्तेमाल नाइट्रोजन का लगभग दो-तिहाई भाग नदियों में चला जाता है, जिससे समुद्री पर्यावरण और नदियां भी गंदी हो रही हैं। इसके विपरीत जैविक खेती इस तरह के नाइट्रोजन प्रवाह को हमारे इकोसिस्टम में जाने से रोकती है। जैविक कृषि प्रणालियों में ऊर्जा का उपयोग 30-50% तक कम है।

फायदा: जैविक खेती प्रदूषण कम करती है। पानी और मिट्टी बचाती है। इससे पेड़, पशु-पक्षी सभी को नुकसान नहीं होता। जीवन बेहतर बनता है।

4) बिजली का उपयोग सुधारें क्योंकि बिजली बनाने में सबसे ज्यादा प्रदूषण

जब भी आप उपकरण खरीदें तो यह भी चैक करें कि बिजली के उपयोग के मामले में इनकी रेटिंग क्या है। जैसे एनर्जी स्टार रेटिंग वाला रेफ्रिजरेटर बिजली की खपत नौ प्रतिशत कम करता है। 5-स्टार एसी औसतन 3-स्टार एसी से 28% तक अधिक ऊर्जा बचा सकता है। जब आप कमरे से बाहर निकलें तो लैपटाॅप, टीवी, एसी जैसे उपकरण बंद करके निकलें। यह एनर्जी सेविंग का आसान तरीका है।

फायदा: सिर्फ बिजली के इस्तेमाल में इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर भी कुल खपत को 25 से 30% कम किया जा सकता है।

5) बारिश का पानी रोकिए क्योंकि हर घर बचा सकता है लाखों लीटर पानी

प्राकृतिक माहौल में जमीन बारिश का 50% पानी सोख लेती है। इससे भूजल रिचार्ज होता है। शहरी क्षेत्रों में जहां पक्का निर्माण होता है, केवल 15% बारिश का जल ही जमीन में जाता है। इसके अलावा 55% बह जाता है। शहरी क्षेत्रों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को अपनाना जरूरी है। 200 वर्ग मीटर क्षेत्र का हर घर हर साल लगभग 2 लाख लीटर तक पानी जमीन के भीतर पहुंचा सकता है।

फायदा : जल सरंक्षण से भूमि तो उपजाऊ होगी ही, भूजल स्तर बढ़ेगा। पानी को आपके घरों तक पहुंचाने में लगने वाला खर्च भी कम होगा।

6) पेड़ लगाइए क्योंकि पेड़ों के पास जो घर होते हैं वो 15% अिधक मूल्यवान

पेड़ की जड़ें मिट्टी के कटाव को कम करती हैं। पेड़ तूफानों की शक्ति को कम करते हैं और पानी की गुणवत्ता भी सुधारते हैं, नालों और नदियों में कटाव को कम करते हैं। सौ बड़े पेड़ प्रति वर्ष 100,000 गैलन वर्षा के जल को रोक सकते हैं। एक विश्लेषण में पाया गया है कि पेड़ों के पास के घरों का मूल्य तुलनात्मक रूप से 9 से 15 फीसदी अधिक होता है।

फायदा: पेड़ स्वस्थ भी रखते हैं। एक रिसर्च के अुनसार जिन अस्पतालों के पास पेड़ हाेते हैं वहां मरीज जल्दी स्वस्थ हो जाते हैं।

7) प्लास्टिक छाेड़िए क्योंकि इससे हम समुद्री जीवों की जान भी बचा सकते हैं

औसतन हर व्यक्ति हर साल 466 पीस सिंगल यूज प्लास्टिक इस्तेमाल करता है। वर्तमान में समुद्र में 75 से 199 मिलियन टन प्लास्टिक कचरा है। इससे समुद्री जीव खत्म हो रहे हैं। 2040 तक सालाना 23-37 मिलियन टन प्लास्टिक वेस्ट बनने लगेगा। भारत में हर साल 94.6 लाख टन प्लास्टिक कचरा पैदा होता है, जिसमें 43% सिंगल यूज प्लास्टिक है।

फायदा : माइक्रोप्लास्टिक हमारे शरीर में भी पहुंच गया है। यह जहरीले हो सकते हैं इसलिए प्लास्टिक को रोकिए।

8) लोकल अपनाएं क्योंकि खाद्य पदार्थों के परिवहन से होता है वायु प्रदूषण

ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन के पीछे बहुत बड़ा कारण खाद्य पदार्थों का प्रोडक्शन, प्रोसिजर और पैकेजिंग है। भारत में 27% उपभोक्ता लोकल उत्पादों को खरीदना पसंद करते हैं, जबकि फ्रांस में 50% से ज्यादा। ताजे फल सब्जियां स्वस्थ त्वचा और ऊतकों के लिए आवश्यक हैं। पहले से कटे फल तय समय के बाद खराब होने लगते हैं।

फायदा: खाद्य पदार्थों के परिवहन में बहुत ईंधन लगता है, जिससे प्रदूषण बढ़ता है। यह ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन का बड़ा कारण है।

9) ग्रीन एनर्जी अपनाएं क्योंकि कम कर सकते हैं 3000 पाउंड कार्बन उत्सर्जन

जब आप एक किलोवाॅट ग्रीन एनर्जी का इस्तेमाल करते हैं तो कार्बन फुटप्रिंट को सालाना 3,000 पाउंड तक कम कर देते हैं। घर में लगा 5 किलोवाॅट का एक सौर संयंत्र हर साल लगभग 15,000 पाउंड CO2 के उत्सर्जन को रोक सकता है। दुनिया में 40 प्रतिशत CO2 उत्सर्जन बिजली बनाने के लिए हाेने वाले जीवाश्म ईंधन से होता है। प्रकृति के लिए हमें CO2 का उत्सर्जन 45% घटाने की जरूरत है।

फायदा : सौर ऊर्जा, जैव-ऊर्जा, पन-बिजली और पवन ऊर्जा जैसे ग्रीन सोर्स सस्ते भी हाेते हैं। ये आपके बिजली के खर्च को कम कर सकते हैंं।

ये तीन बातें जानना आपके लिए जरूरी

  • 10 लाख साल होती है कांच की लाइफ साइकिल। कांच को बार-बार रिसाइकिल करना और इसे उपयोग में लेना आसान और सुरक्षित है। इसलिए अपने घरों में प्लास्टिक नहीं कांच को अपनाइए।
  • 70% हिस्सा इस धरती पर पानी है। इसमें से 95% हिस्सा महासागरों में है। 2% जमी हुई बर्फ के रूप में है। सिर्फ 1% ही हमारे उपयोग के काबिल है। इसलिए जल की एक-एक बूंद बचाइए।
  • 27 हजार पेड़ रोज काट दिए जाते हैं सिर्फ टिशू पेपर और डिस्पोजेबल बनाने के लिए। हर साल करीब 1 करोड़ पेड़ इसीलिए काटे जाते हैं। दुनिया में 3.4 लाख करोड़ पेड़ हैं। अपने घरों में टिशू पेपर नहीं कपड़े के नैपकिन यूज कीजिए।

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