• 29-05-2024 21:27:04
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चारधाम यात्रा में जीरो डिग्री में भीग रहे भक्त मौसम और लचर व्यवस्था से श्रद्धालु परेशान

अगर आप चारधाम यात्रा पर जाने की सोच रहे हैं या आपका कोई करीबी या फिर जानने वाला इस यात्रा पर है, तो यह खबर जरूर पढ़िए। 22 अप्रैल को शुरू हुई चारधाम यात्रा को 25 दिन हो चुके हैं। अब तक 8 लाख श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं और 29.5 लाख रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। खराब मौसम के कारण तीर्थयात्रियों को जगह-जगह रोका जा रहा है। इससे यात्रा के शेड्यूल के साथ बजट भी गड़बड़ा रहा है। यहां टोकन सिस्टम बनाया गया है। दावा था कि इससे लंबी लाइन में नहीं लगना पड़ेगा। लेकिन लचर यात्रा प्रबंधन के कारण यह दावा हवाई साबित हुआ। इसके अलावा यात्रा पंजीकरण के लिए भी तीर्थयात्रियों को घंटों लाइन में लगना पड़ रहा है। लगभग तीन-तीन किलोमीटर लंबी कतारें लग जाती हैं। दावा था कि इससे लंबी लाइन में नहीं लगना पड़ेगा, लेकिन लचर यात्रा प्रबंधन के कारण यह दावा गलत साबित हुआ।

बद्रीनाथः जोशीमठ क्रॉस करने में 6 घंटे लग रहे 
ऋषिकेश से जोशीमठ के 10 किमी के सफर के बाद जोशीमठ क्रॉस करने में 6 घंटे लग रहे हैं। रोड पर काम चलने से जाम लगता है। कई बार जोशीमठ में रुकना पड़ता है। यहां आपदा प्रभावितों के कारण कई होटल फुल हैं। बद्रीनाथ में भी होटल और धर्मशालाएं बुक हो चुकी हैं।

यमुनोत्री: संकरे मार्ग पर घंटों इंतजार की मजबूरी
भैरव मंदिर से आगे संकरे मार्ग पर घंटों इंतजार की मजबूरी। जानकीचट्टी तक वाहन जा रहे हैं। फिर 5 किमी का पैदल रास्ता है। संकरे मार्ग पर अक्सर जाम लगता है। भैरव मंदिर से आगे श्रद्धालुओं को घंटों इंतजार में खड़े रहना पड़ता है। साथ ही बड़कोट और जानकीचट्टी में पर्याप्त पार्किंग भी नहीं है।

केदारनाथः यात्रा में 5 लोगों की मौत हो चुकी 
सबसे ज्यादा मुश्किलें खराब मौसम के कारण हो रही हैं। कई लोगों की अत्यधिक सर्दी से तबीयत खराब हुई है। 5 लोगों की मौत हो चुकी है। पहले प्रशासन ने घोषणा की थी कि 17 मई तक पंजीकरण रोके जाएंगे। मगर सोमवार को इसे बढ़ाकर 24 मई कर दिया। केदारनाथ के लिए सोनप्रयाग तक वाहन से आ सकते हैं। फिर पांच किमी शटल वाहनों से गौरीकुंड जाते हैं। गौरीकुंड से 19 किमी का पैदल मार्ग है। गौरीकुंड की ऊंचाई समुद्र तल से लगभग 1,800 मीटर है। ये उतनी ही ऊंचाई है, जितनी मसूरी जैसे हिल स्टेशन की होती है। दोपहर में गौरीकुंड में अधिकतम तापमान 20 से 24 डिग्री तक रहता है। जैसे ही श्रद्धालु 6 किमी पैदल यात्रा करके जंगलचट्टी पहुंचते हैं। वहां ऊंचाई 2,650 मी. हो जाती है। यहां से 7 किमी चढ़ाई के बाद आता है रामबाड़ा, जिसकी ऊंचाई 2,800 मी. है। यहां से रुद्र प्वाइंट की 4 किमी की चढ़ाई यात्रियों को सबसे ज्यादा भारी पड़ रही है। क्योंकि यहां अमूमन बारिश और कोहरा रहता है। बारिश से भीगे लोगों में बर्फीली हवाएं ठिठुरन पैदा कर देती हैं। गौरीकुंड से केदारनाथ का रास्ता बहुत संकरी घाटी से गुजरता है। यहां अमूमन रोज बारिश होती है। हल्के गर्म कपड़ों में आए लोग पहले बारिश से भीगते हैं। मगर तब चढ़ाई की वजह से शरीर की गर्मी से उन्हें ठंड महसूस नहीं होती। लेकिन जैसे ही वे गीले कपड़ों के साथ केदारनाथ पहुंचते हैं, तो वहां ऊंचाई 3,583 मीटर हो जाती है। यहां कई बार तापमान शून्य डिग्री तक पहुंच जाता है। जैसे ही शरीर का तापमान सामान्य होता है, तो भीषण सर्दी महसूस होने लगती है। इसके बाद शुरू होती है असली परीक्षा। क्योंकि, इसी हालत में उन्हें दर्शन के लिए घंटों लाइन में लगकर इंतजार करना पड़ता है।

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