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31 मई तक लिगेसी वेस्ट निपटान यानी पुराने कचरों का प्रबंधन करना आवश्यक

पूरब टइम्स दुर्ग। स्वच्छता के मामले में अग्रणी  जिला रहने वाले दुर्ग की स्थिति अब बत्तर होती जा रही है। राज्य के लिए स्वछता कि मिसाल पेश करने वाला जि़ला दुर्ग कुप्रशाासन कि भेट चढ़ रहा । दुर्ग मे कई स्वछता अभियान चले जैसे दुर्ग में ''मोर शहर, मोर जिम्मेदारी' अभियान, निकायों को साफ-सुंदर बनाना लक्ष्य , हमर दुर्ग, सुघ्घर दुर्ग इत्यादि योजनाओ के बाद भी दुर्ग में नगर पालिक निगम के सफाई करने का सिस्टम इतना अव्यवस्थित और मंद था कि शहर में गंदगी नजर आ रही है । लोग भी निगम प्रशासन का कई बार तलब किये मगर परिणाम आखिरकार सामने आही गया। एनजीटी  राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण के द्वार दुर्ग को 31 मई तक अपने सारे अपशिष्ट को निपटाने लिए चेतावनी  दी गई है। 
रायपुर केंद्र सरकार के वार्षिक स्वच्छता सर्वेक्षण में छत्तीसगढ़ को दूसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला राज्य घोषित किया गया था, जबकि दुर्ग जिले के  कुछ क्षेत्र को भारत का दूसरा सबसे स्वच्छ शहर घोषित किया गया था। इसके बावजूद दुर्ग कि ऐसी स्तिथि हो गयी है। दुर्ग शहर के लिए चिंतनीय विषय है । जब केंद्री प्रदुषण बोर्ड पर, राष्टीय हरित प्राधिकरण जैसी  संस्था को दुर्ग को बताना पढ़ रहा है कि कैसे वेस्ट मैनजमेंट करना है।
नगर निगम  दुर्ग, को पुराने कचरों का निपटाने का काम केन्द्रीय प्रदूषण बोर्ड के दिशा-निर्देशों के मुताबिक 31 मई तक पूरा करना है। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर दुर्ग, राजनांदगांव समेत प्रदेश के सात नगरीय निकायों के लिए 31 मई तक लिगेसी वेस्ट निपटान यानी पुराने कचरों का प्रबंधन करना जरूरी कर दिया गया है।

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