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रिजर्व सीटों पर कांग्रेस का LDM फॉर्मूला:विधानसभा चुनाव के लिए नाराज वर्गों को साधने की कवायद; बीजेपी बोली- ये अनुसूचित जाति,जनजाति विरोधी पार्टी है

छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव के लिए कुछ महीने बाकी हैं। बीजेपी-कांग्रेस दोनों सभी विधानसभा सीटों पर नजर जमाने लगी है। इस वक्त आरक्षण समेत कई ऐसे मुद्दे हैं, जिनकी वजह से विशेष वर्गों में नाराजगी है। ऐसे में इन वर्गों को साधने के लिए कांग्रेस ने LDM यानि लीडरशिप डेवलपमेंट मिशन की रणनीति बनाई है। जो आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों में रिजर्व सीटों पर फोकस करेगी। प्रदेश में इस वक्त 39 रिजर्व सीटें हैं। जिनमें बड़ी आबादी एससी और एसटी वर्ग की है। और ये सीटें विशेष रूप से इन्ही वर्गों के लिए आरक्षित है। इनमें से ज्यादातर सीटों पर कांग्रेस के विधायक काबिज हैं। लेकिन आगामी चुनाव में किसी भी तरह की एंटी-इनकम्बेंसी का सामना कांग्रेस को न करना पड़े, और सीटों में कांग्रेस का दबदबा बरकरार रहे, इसलिए ये रणनीति तैयार की गई है। रिजर्व सीटों पर LDM फॉर्मूले के तहत पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की गई है। जो यहां की जिम्मेदारी संभालेंगे। लीडरशिप डेवलपमेंट मिशन के तहत बस्तर सांसद दीपक बैज को बस्तर संभाग का प्रभारी बनाया गया है। और पूरे प्रदेश में विधानसभा वार LDM की नियुक्ति की गई है।

क्या है लीडर डेवलपमेंट मिशन कांग्रेस विधानसभा और लोकसभा से पहले नई लीडरशिप तैयार करना चाहती है। इसके साथ रिजर्व सीटों में मजबूत कैंडिडेट की पहचान करना पार्टी का लक्ष्य है। इसलिए पार्टी के केन्द्रीय नेतृत्व ने LDM यानी लीडर डेवलपमेंट मिशन शुरू किया है। इस फॉर्मूले के तहत आरक्षित लोकसभा और विधानसभा सीटों के लिए बनाए गए पर्यवेक्षक अपनी रिपोर्ट AICC के राष्ट्रीय समन्वयक को सौंपेंगे। कांग्रेस संचार विभाग प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा, नियुक्त किए गए पर्यवेक्षक रिजर्व विधानसभा और लोकसभा सीटों में नेतृत्व उभारने का प्रयास करेंगे। वहां की समस्याएं सुनेंगे और नए नेतृत्व को आगे लाने का अवसर देंगे। इसको लेकर एलडीएम का काम भी शुरू हो गया है। कहा जा रहा है कि प्रदेश की सभी एससी और एसटी वर्ग की आरक्षित सीटों में लीडरशिप डेवलमेंट की रिपोर्ट के. राजू को विधानसभा चुनाव से पहले दी जाएगी। जिसके आधार पर नए चेहरों को मौका दिया जा सकता है।

विधानसभा प्रभारियों की तरह मिला पावर

प्रदेश में विधानसभा की 39 रिजर्व सीटों में 29 सीटें एसटी वर्ग के लिए रिजर्व है,जबकि 10 सीटें एससी वर्ग के लिए आरक्षित है। इन सीटों में अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के नेतृत्व की पहचान कर उन्हें बढ़ावा देना और पार्टी से जोड़ने की रणनीति बनाई गई है। प्रदेश में इस वक्त आरक्षण का मुद्दा गरमाया हुआ है। और इसको लेकर एसटी वर्ग में खासी नाराजगी देखने को मिल रही है। हालांकि आरक्षण का पेंच इस वक्त राजभवन में फंसा हुआ है। लेकिन चुनाव से पहले एससी और एसटी वर्ग में नाराजगी को दूर करने की जिम्मेदारी भी कथित तौर पर पर्यवेक्षक और समन्वयकों को दी गई है। रिजर्व सीटों में नया चेहरा कौन हो सकता है ये भी खोजने की जिम्मेदारी LDM में दी गई है। इसलिए कहा जा रहा है कि विधानसभा प्रभारियों की तरह LDM पर्यवेक्षकों की भी भूमिका विधानसभा और लोकसभा क्षेत्रों में होगी। हालांकि पार्टी खराब परफॉर्मेंस वाली सीटों पर ज्यादा फोकस कर रही है। लेकिन पिछले चुनाव में कांग्रेस ने इन सीटों पर बेहतर किया है। इसलिए कोशिश रहेगी कि इन सीटों में कांग्रेस का दबदबा बरकरार रहे। और जिन सीटों में कांग्रेस को हार झेलनी पड़ी थी वहां नए चेहरे के साथ कांग्रेस चुनावी मैदान में उतरे।

कांग्रेस अनुसूचित जाति,जनजाति विरोधी- बीजेपी
कांग्रेस के LDM फार्मूले को लेकर बीजेपी सह-मीडिया प्रभारी अनुराग अग्रवाल ने कहा, कांग्रेस अनुसूचित जाति और जनजाति विरोधी है। इस समय पूरे देश में कांग्रेस नेतृत्व विहीनता से गुजर रहा है। क्योंकि देश में नए नेतृत्व को उभरने का मौका कांग्रेस में नहीं दिया गया। अभी कांग्रेस के वर्तमान नेतृत्व से लोग खुश नहीं है। इसलिए नए नेतृत्व की तलाश पार्टी कर रही है। आरक्षण के मामले में कांग्रेस के छल को जनता समझ चुकी है इसलिए कोई भी मिशन चला लें, इनका जाना तय है।

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