सुप्रीम कोर्ट ने यूएपीए (UAPA) मामले में जेल में बंद जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (KCBA) के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता मियां अब्दुल कयूम की याचिका पर सुनवाई करते हुए बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश में हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया, हालांकि कयूम की स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए कुछ अहम निर्देश जरूर दिए.
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस एमएम सुंदरश और जस्टिस एनके सिंह की बेंच के सामने यह मामला आया. सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) केएम नटराज ने कहा कि यह जम्मू-कश्मीर से जुड़ा संवेदनशील मामला है और विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार किया जा सकता है, भले ही उसके लिए स्पष्ट प्रावधान मौजूद न हो.
कयूम की ओर से पेश वकील ने अदालत को उनकी खराब स्वास्थ्य स्थिति के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि कयूम के शरीर में केवल एक ही किडनी है और उसमें भी सिस्ट (गांठ) विकसित हो गई है, जिसके लिए तत्काल और बेहतर चिकित्सा सुविधा की आवश्यकता है. साथ ही यह भी कहा गया कि जिस जेल में कयूम बंद हैं, वहां केवल सामान्य इंफर्मरी है और उचित अस्पताल जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं.
इन दलीलों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश में दखल देने से इनकार करते हुए कहा कि फिलहाल उसमें हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है. हालांकि कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस मामले में निर्देश लेने को कहा और कयूम को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए. अदालत ने विशेष तौर पर कहा कि उन्हें एयर कंडीशनर उपलब्ध कराया जाए और उनकी चिकित्सा जरूरतों का तुरंत ध्यान रखा जाए.


