Total Users- 1,224,611

spot_img

Total Users- 1,224,611

Thursday, May 14, 2026
spot_img

दिल की बात- सुरों की जादुई खनक: आशा ताई को एक आत्मीय विदाई

आशा ताई को याद करना यानी एक ऐसी ऊर्जा को याद करना, जिसमें कभी थकान नहीं रही. उन्होंने केवल गाने नहीं गाए, बल्कि हर धुन में एक नई जान फूँकी. अगर लता दीदी की आवाज में ‘भक्ति’ थी, तो आशा ताई की आवाज में ‘शक्ति’ और ‘मुक्ति’ दोनों थी. किसी ने सच ही कहा है कि “आशा जी की आवाज कभी बूढ़ी नहीं हुई.” जब उन्होंने ‘दम मारो दम’ गाया तब भी वही ऊर्जा थी और जब दशकों बाद उन्होंने ‘रंगीला रे’ गाया, तब भी उनकी आवाज की ‘शोखी’ वैसी ही बरकरार थी. 80 की उम्र पार करने के बाद भी जब वे स्टेज पर खड़ी होती थीं, तो उनकी ऊर्जा 18 साल की लड़की जैसी लगती थी. जहाँ एक तरफ उनके कैबरे गानों ने महफिलें लूट लीं, वहीं ‘उमराव जान’ की गजलें सुनकर ऐसा लगता है मानो कोई सूफी रूह बोल रही हो. हिंदी फिल्म इन्डस्ट्री की वह लोकप्रिय आवाज़ जिसने 15 हज़ार गाने मुख्यतः हिंदी के अलावा 9 अन्य भाषाओं में गाये. 7 बार बेस्ट फिल्मफेयर बेस्ट गायिका एवार्ड , 2 बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के अलावा अनेक राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित , पद्म विभूषण “आशा भोसले जी” , सुरों की जादूगरनी को शत-शत नमन और विनम्र श्रद्धांजलि. आज हम उन्हें विदाई दे रहे हैं, लेकिन उनकी आवाज कभी खामोश नहीं होगी. वे अपनी शोखियों, अपनी संजीदगी और अपनी मखमली आवाज के जरिए हमेशा अमर रहेंगी.
इंजी. मधुर चितलांग्या
संपादक, दैनिक पूरब टाइम्स

More Topics

पुडुचेरी में एन रंगासामी ने मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली

पुडुचेरी में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का नेतृत्व कर...

इसे भी पढ़े