Total Users- 1,171,211

spot_img

Total Users- 1,171,211

Saturday, March 14, 2026
spot_img

चित्रकूट का वो अनोखा धाम, जहां श्रीराम और ब्रह्माजी ने मिलकर की थी शिवलिंग की स्थापना

चित्रकूट, जो भगवान राम की तपोभूमि के रूप में विख्यात है, वहां एक ऐसा अद्भुत और दिव्य शिव मंदिर स्थित है जो श्रद्धालुओं के लिए आस्था और चमत्कारों का केंद्र बना हुआ है. यह मंदिर है मतगजेंद्रनाथ मंदिर, जो रामघाट पर स्थित है और इसका विशेष महत्व सावन मास में और भी अधिक बढ़ जाता है.

भारत की धार्मिक और पौराणिक नगरी चित्रकूट अपने कण-कण में भगवान श्रीराम की उपस्थिति समेटे हुए है. इसी पावन भूमि पर रामघाट के समीप एक ऐसा अलौकिक शिव मंदिर स्थित है, जिसका महत्व पूरे भारतवर्ष में अद्वितीय है. यह है मतगजेंद्र नाथ मंदिर, जहां स्थापित शिवलिंग के बारे में मान्यता है कि इसे स्वयं भगवान राम और ब्रह्मा जी ने मिलकर स्थापित किया था. यह मंदिर सिर्फ एक पूजा स्थल नहीं, बल्कि भक्तों की आस्था और पौराणिक कथाओं का जीवंत प्रतीक है. पूरे भारत में अनगिनत शिव मंदिर हैं, लेकिन श्रीराम की तपोस्थली में स्थित यह विशिष्ट मंदिर एक अलग ही पहचान रखता है.

श्रीराम और ब्रह्माजी द्वारा स्थापित शिवलिंग

मतगजेंद्र नाथ मंदिर की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसका प्राचीन शिवलिंग है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस पवित्र शिवलिंग की स्थापना भगवान राम ने अपने वनवास काल के दौरान ब्रह्मा जी के साथ मिलकर की थी. यह तथ्य ही इस मंदिर को भक्तों के लिए अत्यंत पूजनीय बनाता है.

चित्रकूट के राजा ‘मतगजेंद्र नाथ’

इस शिवलिंग को चित्रकूट का राजा भी कहा जाता है, और इसी कारण इस मंदिर का नाम मतगजेंद्र नाथ पड़ा. यह नाम भगवान शिव के उस विराट स्वरूप को दर्शाता है जो इस पावन नगरी में सर्वोच्च अधिपति के रूप में विराजमान हैं.

सावन में कांवड़ियों की अटूट आस्था

सावन का महीना आते ही मतगजेंद्र नाथ मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ती है. देश के कोने-कोने से कांवड़ यात्री यहां पहुंचते हैं और अपनी कांवड़ यात्रा की पूर्णता के लिए इस पवित्र शिवलिंग पर जल चढ़ाते हैं. ऐसी मान्यता है कि जब तक यहां जल अर्पित नहीं किया जाता, तब तक उनकी कांवड़ यात्रा सफल नहीं मानी जाती. यह इस मंदिर के महत्व और भक्तों की अटूट श्रद्धा का परिचायक है.

इतिहास और आस्था का संगम

मतगजेंद्रनाथ मंदिर केवल एक पूजा स्थल नहीं, बल्कि हज़ारों वर्षों की आस्था, परंपरा और मान्यता का जीवंत प्रमाण है. यहां की हर दीवार, हर घंटा, हर स्वर आपको भगवान शिव और राम की दिव्य उपस्थिति का अनुभव कराता है.

मनोकामना पूर्ति का अद्भुत उपाय

मंदिर से जुड़ी एक और विशेष मान्यता यह है कि यदि कोई श्रद्धालु सावन के महीने में बेलपत्र पर ‘राम-राम’ लिखकर इस शिवलिंग पर अर्पित करता है, तो उसकी समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. यह प्रथा भगवान राम के प्रति अगाध श्रद्धा और भगवान शिव के प्रति भक्ति का एक सुंदर संगम दर्शाती है.

More Topics

प्रधानमंत्री आवास योजना से साकार हुआ पक्के घर का सपना

रायपुर। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के माध्यम से जिले...

नवागढ़ की प्राचीन धरोहरों के संरक्षण के लिए राज्य सरकार सजग

-संस्कृति एवं पुरातत्व मंत्री राजेश अग्रवाल ने दिए सर्वेक्षण...

इसे भी पढ़े