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Saturday, March 7, 2026
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गुरुग्राम का शीतला माता का मंदिर है खास, जानें कौन हैं शीतला माता? जानें नवरात्रि में उनकी पूजा का महत्व

 गुरुग्राम का शीतला माता मंदिर श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है. मां शीतला केवल आरोग्य ही नहीं बल्कि सुख, शांति और समृद्धि का भी आशीर्वाद देती हैं. नवरात्रि में उनकी पूजा करने से नकारात्मक ऊर्जा और रोगों से मुक्ति मिलती है.

भारत भूमि पर मां दुर्गा के अनेक रूपों की पूजा की जाती है. उन्हीं में से एक स्वरूप माता शीतला देवी भी हैं, जिन्हें रोगनाशिनी और आरोग्य की देवी कहा जाता है. हर साल नवरात्रि में मां शीतला की पूजा विशेष महत्व रखती है. हरियाणा के गुरुग्राम स्थित शीतला माता मंदिर देशभर में प्रसिद्ध है और यहां भक्तजन दूर-दूर से आकर माता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.

कौन हैं शीतला माता?

शीतला माता को मां दुर्गा का ही एक स्वरूप माना जाता है.

शास्त्रों के अनुसार वे रोग और विशेषकर संक्रामक बीमारियों से रक्षा करती हैं.

माता के हाथ में झाड़ू, कलश, नीम की पत्तियां और सूप होता है, जिनका संबंध शुद्धि और रोगनाश से है.

मान्यता है कि उनकी पूजा करने से चेचक, पित्त और अन्य रोगों से मुक्ति मिलती है.

शीतला माता मंदिर, गुरुग्राम

यह मंदिर हरियाणा के गुरुग्राम (गुड़गांव) जिले में स्थित है और इसे देश के सबसे प्राचीन और लोकप्रिय शक्तिपीठों में गिना जाता है.

लोकमान्यता है कि पांडव काल से ही यहां माता की पूजा होती आ रही है.

नवरात्रि और बसंत पंचमी के समय यहां विशेष मेले का आयोजन होता है, जहां हजारों श्रद्धालु माता का दर्शन करने आते हैं.

माता के दरबार में रोगमुक्ति और संतान सुख की कामना करने वाले भक्त अपनी मनोकामना पूर्ण होने पर विशेष भोग चढ़ाते हैं.

नवरात्रि में शीतला माता पूजा का महत्व

नवरात्रि के दौरान नौ देवियों की पूजा होती है, जिनमें शीतला माता की आराधना विशेष रूप से आरोग्य और शुद्धि के लिए की जाती है.

मान्यता है कि नवरात्रि में उनकी पूजा करने से घर-परिवार रोगों से सुरक्षित रहते हैं.

भक्तजन इस दिन नीम की पत्तियां, हल्दी, दही और ठंडे पकवान का भोग लगाते हैं.

कई जगह पर शीतला माता की पूजा अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन के साथ भी की जाती है.

पूजा विधि (Pujan Vidhi)

शीतला माता की मूर्ति के सामने दीपक जलाएं और नीम की पत्तियों, हल्दी और जल से अर्घ्य अर्पित करें.

माता को ठंडे व्यंजन और प्रसाद चढ़ाना शुभ माना जाता है.

पूजा के समय दुर्गा सप्तशती के मंत्र या शीतला माता की स्तुति का पाठ करें.

रोगमुक्ति और आरोग्य के लिए माता से प्रार्थना करें.

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