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Monday, February 16, 2026
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क्या सावन पूर्णिमा का व्रत व स्नान-दान अलग-अलग होगा ?

सावन पूर्णिमा का स्नान और दान अत्यंत शुभ माना गया है। भगवान शिव को समर्पित सावन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को सावन पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है और इस दिन ही रक्षा बंधन का त्योहार भी मनाते हैं। रक्षा बंधन के दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं और लंबी आयु की कामना करती है। साथ ही भाई उनकी उम्र भर रक्षा का वचन देते हैं। लेकिन इस बार सावन पूर्णिमा का व्रत व स्नान-दान अलग-अलग दिन किए जाएंगे। जानें सावन पूर्णिमा का व्रत कब है और कब किया जाएगा स्नान-दान व मुहूर्त।

सावन पूर्णिमा कब है:
द्रिक पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 08 अगस्त को दोपहर 02 बजकर 12 मिनट पर प्रारंभ होगी और 09 अगस्त को दोपहर 01 बजकर 24 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि में सावन पूर्णिमा 09 अगस्त को है।

सावन पूर्णिमा व्रत कब है:
सावन पूर्णिमा का व्रत 08 अगस्त को रखा जाएगा क्योंकि 09 अगस्त को पूर्णिमा तिथि दोपहर तक रहेगी। ऐसे में सावन पूर्णिमा का चंद्रोदय 08 अगस्त को शाम 06 बजकर 42 मिनट पर होगा। पूर्णिमा व्रत में चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है और पूजा की जाती है। ऐसे में सावन पूर्णिमा का व्रत करने वाले लोगों के लिए 8 अगस्त को चंद्रदेव की पूजा-अर्चना करना व अर्घ्य देना उत्तम रहेगा।

सावन पूर्णिमा का स्नान-दान कब किया जाएगा:
सावन पूर्णिमा का स्नान-दान 09 अगस्त को किया जाएगा। इस दिन स्नान-दान का ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04 बजकर 22 मिनट से सुबह 05 बजकर 04 मिनट तक रहेगा। देखें स्नान-दान के अन्य मुहूर्त भी:

अभिजित मुहूर्त- दोपहर 12:00 बजे से दोपहर 12:53 बजे तक।
विजय मुहूर्त- दोपहर 02:40 बजे से दोपहर 03:33 बजे तक।
गोधूलि मुहूर्त- शाम 07:06 बजे से शाम 07:27 बजे तक।
सर्वार्थ सिद्धि योग- सुबह 05:47 बजे से दोपहर 02:23 बजे तक।

सावन पूर्णिमा पर स्नान दान का महत्व:
सावन पूर्णिमा के दिन पवित्र नदी में स्नान करने व सामर्थ्यनुसार दान करने से जातक को अभीष्ट फलों की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि सावन पूर्णिमा पर किया गया दान अक्षय पुण्य प्रदान करता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

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