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Monday, February 16, 2026
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कब और कैसे शुरु हुई बांके मंदिर में फूलों की होली का उत्सव?

सम्पूर्ण भारत में होली का त्योहार उत्साह और धूमधाम से मनाया जाता है। सबसे ज्यादा हर्षोल्लास के साथ ब्रज की होली मनाई जाती है। ब्रज में बांके बिहारी मंदिर में फूलों की होलाी का उत्सव बेहद ही खास होता है। आपको बता दें कि यह होली रंगों से नहीं, बल्कि फूलों से खेली जाती है। इस दिन पर मंदिर को रंग-बिरंगे फूलों से सजाया जाता है। भक्त एक-दूसरे पर फूलों की वर्षा करते हैं। यह दृश्य बेहद ही मनमोहक होता है। आपको बताते चलें कि बांके बिहारी मंदिर में फूलों की होली 10 मार्च यानी के आज खेली जा रही है। इस दिन होली के रंगों की जगह पर फूलों का इस्तेमाल किया जाता है।

वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में आज मनाई जा रही फूलों की होली
वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में हर साल होली का त्योहार बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। दुनियाभर में ब्रज की होली बेहद ही प्रसिद्ध है। बांके बिहारी मंदिर में फूलों की होली का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि फूलों की होली खेलने से सभी भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती है।

गौरतलब है कि बांके बिहारी मंदिर में फूलों की परंपरा का इतिहास बेहद प्राचीन रहा है। माना जाता है कि इस परंपरा की शुरुआत स्वामी हरिदास जी ने की थी, जो कि बांके बिहारी जी के प्रकटकर्ता थे। गर्मी के मौसम में भगवान को ठंडक पहुंचाने के लिए फूलों से श्रृंगार करने परंपरा शुरु की थी। आपको बता दें कि, गर्मी के मौसम में बांके बिहारी मंदिर में फूल बंगला सजाए जाते हैं। यह परंपरा कामदा एकादशी से शुरु होती है और हरियाली अमावस्या तक चलती है। इस अवधि के समय मंदिर को विभिन्न प्रकार के देशी और विदेशी फूलों से सजाया जाता है।

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