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कानूनी सहायता क्लिनिक: महिलाएं अब कमजोर नही

पूरब  टाइम्स। कल तक कमजोर और दूसरों पर निर्भर रहने वाली महिलाएं आज सशक्त और आत्मनिर्भर बन रही हैं। महिलाओं के सपने को पंख देने के लिए सरकार भी हर तरह से उनका साथ दे रही है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना, प्रधानमंत्री समर्थ योजना से बेटियों को सहयोग मिल रहा है। सशक्त बनाने के साथ ही कानूनी सुरक्षा पर भी पूरा जोर दिया जा रहा है। महिला शक्ति केंद्र, महिलाओं के खिलाफ साइबर अपराधों की रोकथाम, तीन तलाक और अब कानूनी सेवा क्लिनिक महिलाओं के लिए तत्पर है।

क्या है कानूनी सहायता क्लिनिक ?
महिलाओं के लिए कानूनी सहायता को अधिक सुलभ बनाने के अभियान में, राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने दिल्ली राज्य विधिक सेवाएं प्राधिकरण (डीएसएलएसए) के सहयोग से एक कानूनी सहायता क्लिनिक की शुरुआत की है। यह क्लिनिक निःशुल्क कानूनी सहायता देकर महिलाओं की शिकायतों का समाधान करने के लिए एकल-खिड़की सुविधा के रूप में कार्य करेगी। कानूनी सहायता क्लिनिक दिल्ली में आयोग के दफ्तर के बाहर से काम करेगा। वे महिलाएं जिनके पास न्यायालय जाकर कानूनी समस्या को रखने के लिए धन नहीं है, उनके लिए यह व्यवस्था फायदेमंद है।

कानूनी सहायता क्लिनिक क्यों जरूरी ?
कानूनी सहायता क्लिनिक निःशुल्क कानूनी सेवाएं देती हैं। इसलिए ये उन महिलाओं के लिए जरूरी है जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं। विधिक जागरूकता अथवा विधिक साक्षरता से महिलाओं को कानून से सम्बन्धित सामान्य बातों से परिचित कराकर उनका सशक्तिकरण किया जाएगा। कानूनी सहायता क्लिनिक महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करने और उन्हें कानूनी परामर्श करने के लिए वन-स्टॉप केंद्र उपलब्ध कराने पर ध्यान देगी। सेवाओं में महिला को जनसुनवाई में सहायता, मुफ्त कानूनी सहायता, वैवाहिक मामलों में सुनवाई और आयोग में पंजीकृत अन्य शिकायतों के बारे में सहायता दी जाएगी।

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