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अधिग्रहण के बाद कब्जा नहीं छोड़ना अतिक्रमण की श्रेणी में

हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला-सुप्रीम कोर्ट ने मामला दोबारा सुनवाई के लिए भेजा था हाई कोर्ट।

बिलासपुर। हाई कोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि निर्माण कार्य के प्रायोजन के लिए अधिग्रहित की गई जमीन का नियमानुसार मुआवजा का प्रकरण पूर्ण कर लिया है और उसके बाद भी भूमि स्वामी कब्जा नहीं छोड़ता है तो ऐसी स्थिति में उसे अतिक्रमणकारी की श्रेणी में माना जाएगा। हाई कोर्ट ने यह व्यवस्था देते हुए याचिकाकर्ता भूमि स्वामी की याचिका को खारिज कर दिया है।

मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि जब भी भूखंड के किसी बड़े भू भाग का भूमि अर्जन की प्रक्रिया पूरी की जाती है तो पंचनामा के आधार पर ही इसे पूरा किया जाता है। एक-एक भूखंड पर जाकर कब्जे की कार्रवाई की नहीं की जा सकती। न तो तार का बाड़ लगाया जा सकता है और न ही दीवार खड़ी की जा सकती है। काबिज व्यक्ति को हटाया भी नहीं जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने पंचनामा पद्धति को सही करार दिया है। लिहाजा याचिका खारिज करने योग्य है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि पंचनामा और भू अर्जन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी जमीन पर कब्जा नहीं छोड़ता है चाहे व वह भूमि स्वामी की क्यों न हो तो ऐसी स्थिति में उसे अतिक्रमणकारी माना जाएगा। नई राजधानी विकास प्राधिकरण में स्थित क्रिकेट स्टेडियम के बगल में खेलग्राम बनाने के लिए वर्ष 2012 में राज्य शासन ने योजना बनाई। इसी के तहत भूमि का अधिग्रहण किया गया था। वर्ष 2012 में अधिग्रहित की गई भूमि के संबंध में भूमि स्वामी ग्राम परसदा निवासी हेमराज चंद्राकर और प्रकाश निषाद ने भूमि अधिग्रहण नियम को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।

विलंब से मामला दायर करने की बात कहते हुए हाई कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया था। सिंगल बेंच के फैसले को याचिकाकर्ता किसानों ने डिवीजन बेंच में चुनौती दी थी। डिवीजन बंेच ने सिंगल बेंच के फैसले को सही ठहराते हुए अपील को खारिज कर दिया था। डिवीजन बंेच के फैसले को चुनौती देते हुए किसानों ने सुप्रीम कोर्ट मंें अपील की थी। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि वे जमीन पर अब भी काबिज हंै। पंचनामा के आधार पर अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी की गई है। मामले की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को वापस हाई कोर्ट भेज दिया था। हाई कोर्ट को मामले की सुनवाई के निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे। हाई कोर्ट ने सुनवाई के बाद तीसरी बार याचिका को खारिज कर दिया है।

जमीन प्राधिकरण के कब्जे में

मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट में अपने फैसले में कहा कि याचिकाकर्ताओं द्वारा काबिज भूखंड को नई राजधानी विकास प्राधिकरण को कब्जे में दे दिया गया है। दस्तावेज में प्राधिकरण का कब्जा है। जमीन का कब्जा प्राधिकरण के पास होने और विलंब से याचिका दायर करने के कारण याचिका को खारिज किया जाता है।

 

 

 

 

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