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सितंबर में एशिया कप के बाद भारतीय टीम की ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ घरेलू टी-20 सीरीज

इस सप्ताह के अंत में या अगले सप्ताह की शुरुआत में, भारत के चयनकर्ता एशिया कप के लिए टीम का सिलेक्शन करेंगे। इस दौरान अक्टूबर में ऑस्ट्रेलिया में होने वाले टी-20 विश्व कप से पहले चयनकर्ता आखिरी बार एक साथ बैठेंगे सितंबर में एशिया कप के बाद भारतीय टीम की ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ घरेलू टी-20 सीरीज हैं। हालांकि, संभावना है कि उन मैचों से पहले ही विश्व कप टीम का चयन करके ICC को सूचित करना होगा।

दो में से किसी एक ऑप्शन के साथ जा सकते हैं चयनकर्ता
भारत एशिया कप के लिए दो तरह का नजरिया अपना सकता है: अपनी सर्वश्रेष्ठ टीम चुनें, या विश्व कप के विकल्पों का आकलन करने के लिए टूर्नामेंट का उपयोग करें। फिलहाल जो नजर आ रहा है, उसके हिसाब से 15 में 12 स्थान भरे हुए नजर आते हैं। बल्लेबाजी के मोर्चे पर रोहित शर्मा, विराट कोहली, केएल राहुल, सूर्यकुमार यादव, ऋषभ पंत और दिनेश कार्तिक। हार्दिक पांड्या और रवींद्र जडेजा दो ऑलराउंडर होने चाहिए। जसप्रीत बुमराह, भुवनेश्वर कुमार और हर्षल पटेल तेज गेंदबाजों के तौर पर टीम का हिस्सा बनने की दौड़ में सबसे आगे नजर आते हैं। इनके साथ कलाई के स्पिनर के तौर पर युजवेंद्र चहल का लिया जाना भी लगभग तय है।

टॉप'2 को साथ में अवसर मिल सकता है
भारत इन 12 खिलाड़ियों को प्राथमिकता देते हुए टी-20 वर्ल्ड कप से पहले बड़े टूर्नामेंट में एक साथ खेलने का अनुभव देता है या दूसरे दावेदारों को मौका देता है, यह देखने वाली बात होगी। 12 स्पॉट के लिए प्लेयर तय होने के बाद गौर करने वाली बात ये है कि बचे 3 स्थानों पर दावेदारी कैसे तय होगी। दरअसल बात ये है कि इन 3 खाली जगहों में कई खिलाडियों का भविष्य दांव पर लगा है।

दीपक चाहर और भुवनेश्वर में चयन को लेकर कड़ी टक्कर
बहुत समय पहले की बात नहीं है, दीपक चाहर पावरप्ले विकेट-टेकर के रूप में भारत के पसंदीदा विकल्प हो सकते थे, लेकिन उनकी चोट के बीच भुवनेश्वर ने अपनी पुरानी लय हासिल कर ली। चाहर की छक्के मारने की क्षमता हालांकि अभी भी उन्हें टी-20 वर्ल्ड कप टीम का दावेदार बनाती है, खासकर अगर जडेजा नहीं चलते तो बैकअप के तौर पर दीपक मौजूद होंगे हार्दिक और जडेजा जहां ऑलराउंडर के रूप में भारत की पहली पसंद होंगे, वहीं जडेजा का बल्ले और गेंद दोनों से स्ट्राइक रेट इस साल टीम के लिए चिंता का विषय रहा है। इसलिए अगर जडेजा की बल्लेबाजी अच्छी नहीं होती है, तो भारत अधिक आक्रामक स्पिन विकल्प की तलाश कर सकता है। ऐसे में चाहर बल्लेबाजी क्रम को लंबा कर सकते हैं। भारत निश्चित रूप से देखना चाहेगा कि दीपक चाहर एशिया कप की दबाव भरी परिस्थिति में कैसा प्रदर्शन करते हैं।

आर. अश्विन की स्पिन उन्हें बनाती है टीम में आने का बड़ा दावेदार
2022 मेंअश्विन का टी-20 में जडेजा की तुलना में बेहतर बल्लेबाजी स्ट्राइक रेट है, लेकिन इस फॉर्मेट में अश्विन के फिर से उभरने का कारण बल्लेबाजी नहीं है। अश्विन की दावेदारी की प्रमुख वजह उनकी ऑफस्पिन है, जिसके तरफ दुनियाभर की तमाम टीमों ने रुख किया है। एक ऐसा गेंदबाज जो हर मैच में 4 ओवर का कोटा पूरा करने की क्षमता रखता है और विकेट हासिल करने के अवसर भी पैदा करता है। हो सकता है कि कुछ मुकाबलों में उसका प्रदर्शन खराब हो जाए, लेकिन वह वापसी की क्षमता रखते हैं। अश्विन के पास कई बाएं हाथ के बल्लेबाजों वाली टीमों के खिलाफ खेलने का अच्छा मौका है, खासकर अगर भारत जडेजा के रन कहीं और से ढूंढ सकता है। हालांकि, अगर वे दाहिने हाथ के भारी लाइन-अप के खिलाफ हैं, तो चहल और जडेजा शायद पहली पसंद के स्पिनरों के रूप में खेलेंगे। ऐसी सिचुएशन की कल्पना करना कठिन है, जिसमें भारत तीन स्पिनरों के साथ खेलता है।

अक्षर पटेल को जडेजा के बैकअप के तौर पर लिया जा सकता है
अक्षर जडेजा के लिए एक ही तरह के बैक-अप हैं। प्रारूप जितना छोटा होता जाता है, अक्षर जडेजा की जगह के लिए उतना ही बड़ा खतरा पैदा करते हैं। हालांकि, यह संभावना नहीं है कि भारत एक ऐसे खिलाड़ी को चुनेगा जो उस सटीक भूमिका में बैक-अप हो और बहुत कुछ नहीं। आखिर में नौबत होगी कि प्लेइंग'1 में या तो जडेजा या अक्षर होने जा रहे हैं। इसलिए अगर अक्षर एशिया कप के लिए टीम के लिए जगह बनाते हैं, तो इसका मतलब यह होगा कि वह अभी भी जडेजा की जगह के लिए खतरा हैं।

दीपक हुड्डा 15 खिलाड़ियों में शामिल हो सकते हैं
हुड्डा ने 2022 में आए हर मौके का फायदा उठाया। उन्होंने गेंद से भी अपनी उपयोगिता साबित की है। सवाल है कि क्या उन्हें बाएं हाथ के बल्लेबाजों के खिलाफ एक या दो ओवर करने की जरूरत है। हालांकि, यह संभावना है कि पहले बताए गए 12 तय खिलाड़ियों में से एक बल्लेबाज पहले से ही बेंच पर होगा। इसके बावजूद हुड्डा के लिए 15 की टीम में दूसरे बल्लेबाजी बैक-अप के रूप में जगह हो सकती है।

अर्शदीप सिंह की लेफ्टआर्म डेथ बॉलिंग हो सकती है उपयोगी
अर्शदीप की USP डेथ ओवर्स में यॉर्कर डालने की क्षमता है। इसके अलावा उनके पक्ष में यह बात भी जाती है कि टीम चयन की दौड़ में वह एकमात्र लेफ्ट हैंडर पेसर हैं। यदि भारत केवल एक तेज गेंदबाजी बैक-अप लेता है, तो यह अर्शदीप बनाम चाहर हो सकता है। ऐसे में दीपक चाहर की बैटिंग क्षमता के आगे अर्शदीप की हार निश्चित है। यह इसलिए भी है क्योंकि भारत के पास बुमराह और चहल के तौर पर 2 गेंदबाज पहले से ही मौजूद हैं, जिनसे बैटिंग के मोर्चे पर ज्यादा उम्मीद नहीं की जाती।

कुलदीप यादव और रवि बिश्नोई में से किसी एक पर चयनकर्ता खेल सकते हैं दांव
दोनों कलाई के स्पिनर पिछले कुछ महीनों से भारत के T-20I सेट-अप के आसपास हैं। हालांकि,भारत के हालिया चयनों से पता चलता है कि वे एक ही प्लेइंग'1 में दो रिस्ट स्पिनर नहीं रखेंगे। यह भी दिखाई पड़ रहा है कि चहल के लिए बैक-अप के तौर पर किसी खिलाड़ी को टीम में शामिल नहीं किया जा रहा है।

 

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