• 23-02-2024 21:14:39
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सीट बढ़ाने के लिए पार्टियों ने लिया बागियों का सहारा, दर्जनभर नेताओं ने मुकाबले को बनाया त्रिकोणीय

विधानसभा चुनाव में इस बार दलबदलू नेताओं की भी काफी दखल रही। भाजपा, कांग्रेस और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जे (जकांछ) ने लगभग दर्जनभर ऐसे नेताओं को मैदान में उतारा था, जो अन्य दोनों पार्टियों में से किसी एक से अलग हो गए थे। यानी बागियों को शरण देने के बाद इन पार्टियों ने उन्हें पूरी तवज्जो दी। ऐसा इन पार्टियों ने इस उम्मीद के साथ किया कि उनकी जीत का आंकड़ा बढ़ जाएगा। अब यह तो तीन दिसंबर को चुनाव परिणाम आने के बाद ही पता चल पाएगा कि इस रणनीति का किस पार्टी को कितना फायदा या नुकसान हुआ। कांग्रेस ने जांजगीर-चांपा निर्वाचन क्षेत्र से व्यास कश्यप को मैदान में उतारा, जिन्होंने 2018 का विधानसभा चुनाव बसपा के टिकट पर लड़ा था और उससे पहले वह सक्रिय रूप से भाजपा का हिस्सा थे। इसी तरह गुरु खुशवंत सिंह को आरंग निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा ने उतारा, जो मौजूदा कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस नेता शिव डहरिया के खिलाफ चुनाव लड़े। वह पहले कांग्रेस में थे। अनुभवी कांग्रेस नेता धरमजीत सिंह लोरमी सीट से 2018 के चुनाव में जकांछ के विधायक चुने गए थे। वह हाल ही में भाजपा में शामिल हुए और पार्टी ने उन्हें तखतपुर से टिकट दिया। जकांछ ने मस्तूरी सीट से भाजपा की बागी चांदनी भारद्वाज को मैदान में उतारा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि छत्तीसगढ़ में जिन नेताओं और विधायकों ने पार्टियां बदली हैं, वे लंबे समय से राजनीति में नहीं हैं। अगर किसी अन्य पार्टी ने उन्हें प्रत्याशी बनाया है तो वे जीतने में सफल रहे हैं लेकिन अगर उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा है तो उनका राजनीतिक भविष्य भी खतरे में है क्योंकि राज्य की जनता दलबदलू नेताओं पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं करती। हालांकि, इस चुनाव में सभी पार्टियों ने दलबदलुओं को प्रत्याशी बनाया है।

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