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हमारे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी हमारा गौरव, दधीचि की तरह आत्मदान कर देश को दिलाई पराधीनता से मुक्ति - मुख्यमंत्री श्री बघेल

रायपुर। हमारे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी हमारे गौरव हैं। मातृभूमि की रक्षा के लिए, आम जनता की भलाई के लिए उन्होंने अपने प्राणों की परवाह नहीं की। पद्मश्री स्वर्गीय डॉ. महादेव प्रसाद पांडेय ने तो 13 साल की छोटी सी आयु में स्वाधीनता संघर्ष में हिस्सा लिया, वहीं समाजसेवी स्वर्गीय  नारायण प्रसाद अवस्थी ने आयुर्वेद की शिक्षा के विकास के लिए अपनी मालगुजारी के पांच गांव त्याग दिये। ये हमारे पुरखे दधीचि की तरह हैं जिन्होंने अपना सब कुछ लूटाकर, दान कर देश को समर्पित कर दिया। 

यह बात मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल ने शासकीय स्वर्गीय नारायण प्रसाद अवस्थी आयुर्वेदिक महाविद्यालय में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और पद्मश्री डॉ. महादेव प्रसाद पांडेय और समाजसेवी स्वर्गीय  नारायण प्रसाद अवस्थी के प्रतिमा अनावरण के अवसर पर कही। मुख्यमंत्री ने कहा कि देवादा मेरे पैतृक गांव से करीब ही है और इस गांव में एक साथ 13 स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने गिरफ्तारी दी थी। उस समय डा. पांडेय नाबालिग थे और पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने को लेकर दुविधा में थी क्योंकि कम आयु के होने के बावजूद वे अंग्रेजों का प्रखर प्रतिरोध कर रहे थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं साइंस कालेज में पढ़ता था और बगल के ही आयुर्वेदिक कालेज में स्वर्गीय नारायण प्रसाद अवस्थी की दानशीलता की कहानियां सुनने में आती थीं। उन्होंने अपनी मालगुजारी के पांच गांव दान में दे दिये। उन्होंने दानशीलता की अद्भुत मिसाल प्रस्तुत की। उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य की बढ़ोत्तरी के लिए और आयुर्वेद की उन्नति के लिए यह कार्य किया। शिक्षा के प्रसार के लिए किया गया कोई भी कार्य बहुत सार्थक होता है।

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