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दुर्ग-भिलाई समाचार

नगर निगमों की " सिटी बस " मामले की जांच जरूरी ?

भिलाई व रिसाली नगर निगम

नगर निगमों की  " सिटी बस " मामले की जांच जरूरी ? 

कहां है हमारी सिटी बस ?

कितनी बस चालू है अभी ?

हिसाब किताब कहां है ?

 पूरब टाइम्स रिसाली, भिलाई. नगर निगम भिलाई की पहल पर भिलाई दुर्ग अर्बन सोसायटी द्वारा 2015 में 130 करोड़ की लागत से यह योजना शुरू की गई थी. शुरुआत में 115 बसों का टारगेट रखा गया था. लेकिन, दुर्ग जिले के लिए सिर्फ 70 बसें ही उपलब्ध कराई गई. उसमें भी 56 बसें ही सड़कों पर दौड़ीं.  जिसमें से 13 नई बसें परमिट नहीं मिलने के चलते तभी कबाड़ में तब्दील हो गई . .  राज्य सरकार द्वारा भिलाई निगम द्वारा संचित निधि से बसों की खरीदी के लिए 10 करोड़ रुपये की मांग की गई थी. निगम ने सस्ती बस सुविधा उपलब्ध होने के लिए गए 10 करोड़ रुपये साल 2015 में राज्य सरकार को दिए. उस दौरान अर्बन पब्लिक सर्विस सोसायटी द्वारा कहा गया था कि यह पैसा निगम को वापस कर दिया जाएगा. लेकिन आज तक नही मिल सका .  24  मार्च 2020 में लाकडाउन के दौरान सिटी बसों का संचालन भी अचानक थम गया था. उसके बाद से सिटी बसें डिपों में ही खड़ी रही. स्थित सामान्य होने के बाद सिटी बसों के फिर से संचालन की मांग उठने लगी. तीन साल से डिपो में खड़ी होने की वजह से ज्यादातर बसें कंडम हो गई हैंअब तक अनेक बार प्रशासन व शासन द्वारा सिटी बस प्रचालन के लिये आश्वासन मिलते रहता है . पहल भी दिखाई जाती है पर यक्ष प्रश्न यह ये कि अब तक किये गए खर्च का हिसाब किताब क्या है ? बसों की कंडम स्थिति के लिये ज़िम्मेदारों पर कार्यवाही क्यों नहीं की जा रही है ? क्या इस पूरे भ्रष्टाचार में किन्हीं राजनीतिक हस्तियों का हाथ है जिसके कारण पूरे मामले को ठंडे बस्ते में डाला गया है . पूरब टाइम्स की एक रिपोर्ट ...

भिलाई की सिटी बस सेवा, "किस फाइल में दफन है ?"

भिलाई का महापौर अपने वार्ड के मतदाताओं के लिए सार्वजनिक परिवहन साधन उपलब्ध करवाने की बात करके वोट तो लेता है लेकिन यही महापौर भिलाई की उन श्रमिक बस्तियों को सार्वजनिक परिवहन साधन से वंचित करने वाली निगम प्रशासन की गतिविधियों को अपनी मौन सहमति देकर बढ़ावा भी देता है.  भिलाई के महापौर की यह दोहरी राजनैतिक भूमिका इस बात को स्पष्ट करती है कि जैसे ही भिलाई के महापौर ने शहर सरकार की सत्ता हासिल की, उसके बाद महापौर ने भिलाई के जनता की उन आधारभूत सुविधाओं को भगवान भरोसे छोड़ दिया जो जनता के लिए अति आवश्यक है.   महापौर ने निगम कोष पर आर्थिक बोझ डालने वाली सिटी बस सेवा के संबंध संज्ञान नहीं लेकर भिलाई की सिटी बस सेवा को "किस फाइल में दफन करवाया है ?" इस आर्थिक विषय के प्रश्न को अब भिलाई की जनता जानना चाहती है .

रिसाली की सिटी बस सेवा, बंद करवाने की उपलब्धि किसे नाम दर्ज है ?

रिसाली निगम क्षेत्र कई आधारभूत सुविधाओं से वंचित है.  इसमें से एक महत्वपूर्ण सेवा सार्वजनिक परिवहन साधन सिटी बस सेवा भी है.  जन सामान्य द्वारा ऐसा माना जा रहा है कि रिसाली निगम के महापौर ने रिसाली की बंद बस सेवा को शुरू नहीं कराया है क्योंकि सिटी बस सेवा मामले में रिसाली की महापौर ने कभी कोई पहल नहीं की और रिसाली निगम क्षेत्र को सार्वजनिक परिवहन सेवा उपलब्ध करवाने के लिए कोई पत्र व्यवहार और पारदर्शी कागजी कार्यवाही नहीं की है . इस कारण से रिसाली की जनता महंगे निजी परिवहन साधन का उपयोग करने को मजबूर हो रही है और अपने पारिवारिक आय में से एक बड़ा हिस्सा पेट्रोल पर खर्च करके रिसाली निगम प्रशासन की विफलता का खामियाजा भुगत रहीं है .

गरीब आदमी को मुख्य धारा से जोड़ने वाली सिटी बस के पहिए कब घूमेंगे ?

भिलाई रिसाली निगम क्षेत्र में बहुत बड़ी संख्या में ऐसे परिवार निवासरत हैं जिनकी आर्थिक स्थिति महबूत नहीं है और जिनके पास परिवार के सभी सदस्यों के लिए अलग अलग वाहन खरीदने वित्तीय प्रबंध भी नहीं है ,  महंगे पेट्रोल को डलवाने के लिए पारिवारिक बजट भी साथ नहीं दे रहा है इसलिए यह जरूरी हो जाता है कि भिलाई और रिसाली निगम क्षेत्र में सार्वजनिक बस सेवा शुरू किया जाए . गौरतलब रहें कि रिसाली और भिलाई निगम क्षेत्र के लिए सिटी बस सेवा पूर्व में शुरू कि गई थी , बंद होने के बाद शुरू करने की घोषणाएं राज्य सरकार के मंत्रियों द्वारा की भी गईं लेकिन यह सेवा प्रशासकीय उपेक्षा की शिकार हुई  है  . बस सेवा फिर से आज तक बहाल नहीं की गई और रिसाली और भिलाई के लोगो को सिटी बस सेवा से वंचित कर दिया गया है इसलिए इस आरोप को आधार मिल रहा है कि, शहर वासियों के इस आधारभूत सुविधा को भिलाई और रिसाली के महापौर ने अपनी सोच के कारण छीना है .

 

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