• 23-02-2024 21:47:01
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टमाटर के रेट कंट्रोल करने को सरकार ने मांगे आइडिया

देश भर में कई जगहों पर टमाटर की कीमत 100 के पार चली गई है। आम आदमी की जेब पर टमाटर की बढ़ती कीमतें भारी असर डाल रहीं है। इसके बीच सरकार ने शुक्रवार को कहा कि अगले 15 दिनों में कीमतें स्थिर होने की उम्मीद है। केंद्र सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ कंज्यूमर अफेयर के सेक्रेटरी रोहित कुमार सिंह ने कहा कि सिरमौर और सोलन से फसलें आनी शुरू होने पर कीमतें गिरनी शुरू हो जाएंगी। उन्होंने टमाटर के रेट कंट्रोल करने और साल भर लोगों तक टमाटर पहुंचाने के लिए लोगों से सुझाव मांगे हैं।इसे लेकर टोमैटो ग्रैंड चैलेंज (TGC) हैकथॉन की शुरुआत की गई है। स्टूडेंट्स, रिसर्च स्कॉलर सहित अन्य लोग टमाटर के उत्पादन, प्रोसेसिंग और स्टोरेज क्षमता बढ़ाने को लेकर अपने सुझाव कंज्यूमर अफेयर डिपार्टमेंट की वेबसाइट पर भेज सकते हैं। रोहित ने कहा कि अच्छे सुझावों पर आगे की रणनीति तैयार की जाएगी। बड़े पैमाने पर उनके आइडिया पर काम होगा। सब ठीक रहा तो इसे लेकर योजना भी बनाई जाएगी।

 हिमाचल से फसल आने के बाद टमाटर की कीमतें कम होने की उम्मीद 
रोहित ने बताया कि हिमाचल प्रदेश से फसल आने के बाद दिल्ली में टमाटर की कीमतें कम होने लगेंगी। अगस्त तक टमाटर की कीमतें पूरी तरह से स्थिर होने की उम्मीद है। साल के इस समय टमाटर की कीमतें हमेशा बढ़ जाती है। इस साल, खराब मौसम की स्थिति और आपूर्ति समस्या के चलते कीमतें बढ़ गई हैं। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भारी बारिश से टमाटर की फसल प्रभावित हुई है।

19 मई को मंडी में एक रुपए किलो लगी थी टमाटर की बोली
इसी साल 19 मई को नासिक की कृषि उपज मंडी में किसान अपने टमाटर बेचने पहुंचे थे। मंडी में टमाटर की बोली 1 रुपए प्रति किलो लगी थी। कई किसान मंडी में बेचने की बजाय टमाटर वहीं सड़क पर फेंक कर चले गए थे। एक महीने बाद ही टमाटर की कीमत 110 रुपए किलो हो गई थी।

 1. टमाटर की मौजूदा महंगाई की सबसे बड़ी वजह भारी बारिश है। टमाटर जल्दी खराब होने वाली सब्जी है। इसलिए इसकी निरंतर सप्लाई जरूरी है। पिछले कुछ दिनों से कर्नाटक, तेलंगाना समेत दक्षिणी राज्यों के साथ कुछ पहाड़ी राज्यों में भी भारी बारिश हुई है। इससे टमाटर की फसल को नुकसान पहुंचा है और सप्लाई में बाधा आई है। दिल्ली की आजादपुर थोक मंडी में टमाटर व्यापारी अशोक गनोर ने बताया कि जमीन पर मौजूद टमाटर के पौधे हाल की बारिश के दौरान क्षतिग्रस्त हो गए थे। सिर्फ वे पौधे जो तारों के सहारे खड़े होते हैं, बच गए। यानी फसलों को नुकसान होने से सप्लाई प्रभावित हुई इसलिए कीमतें बढ़ गई हैं।

2. रबी के सीजन यानी दिसंबर-जनवरी में बोए गए टमाटर की फसल पर इस बार गर्मी की मार पड़ी। दक्षिण भारत में इसकी वजह से टमाटर में लीफ कर्ल वायरस से उसकी फसलों को काफी नुकसान हुआ। महाराष्ट्र में सर्दी कम पड़ने और मार्च-अप्रैल में अत्यधिक गर्मी की वजह से ककड़ी वायरस के हमले देखे गए। इस वजह से टमाटर के पौधे सूख गए। कर्नाटक के कोलार में मंडी चलाने वाले सीआर श्रीनाथ कहते हैं कि राज्य में व्हाइट फ्लाई कीट के चलते टमाटर की फसल को नुकसान हुआ। इससे टमाटर की सप्लाई में कमी आई।

3. इस साल मार्च-अप्रैल में टमाटर की खेती से जुड़े किसानों को झटका लगा। थोक बाजार में मार्च में टमाटर की औसत कीमत 5 से 10 रुपए किलो थी। वहीं अप्रैल में यह लगभग 5 से 15 रुपए प्रति किलो थी। मई में किसानों को 2.50 से 5 रुपए प्रति किलो के बीच बेचने के लिए मजबूर होना पड़ा।सतारा जिले के फलटन तालुका के मिरेवाडी गांव के टमाटर उत्पादक अजीत कोर्डे ने कहा कि कीमतों में कमी की वजह से कई किसानों ने अपनी फसलें खेत में ही छोड़ दीं। इससे मार्केट में कम टमाटर आए।

4. पिछले दो साल से नुकसान झेल रहे किसानों ने इस बार टमाटर की बुआई कम की। वेजिटेबल ट्रेडर्स एसोसिएशन के महासचिव अनिल मल्होत्रा ​​ने कहा कि 2020 और 2021 में टमाटर की बंपर फसल हुई और कम कीमत की वजह से किसानों को अपनी उपज डंप करनी पड़ी। इस वजह से हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड में किसानों ने इस साल टमाटर के उत्पादन में कटौती की और फूल उगाए। यही वजह है कि पिछले कुछ सालों की तुलना में इस बार टमाटर का उत्पादन आधा हो गया।

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