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मणिपुर हिंसा, इंफाल में भीड़ और सेना के बीच फायरिंग:शाह 24 जून को ऑल-पार्टी मीटिंग करेंगे; कांग्रेस बोली- मणिपुर में करें बैठक

मणिपुर में 3 मई से शुरू हुई हिंसा के 50 दिन पूरे हो गए हैं, लेकिन हालात खराब बने हुए हैं। यहां रोजाना ही फायरिंग या ब्लास्ट की घटनाएं हो रही हैं।गुरुवार सुबह 5 बजे इंफाल वेस्ट जिले के नॉर्थ बोलजांग में अज्ञात लोगों और असम राइफल्स ट्रूप के बीच फायरिंग हुई। इसमें दो सैनिक घायल हो गए। दोनों की हालत स्थिर है।इससे पहले बुधवार रात बिष्णुपुर में कार विस्फोट में 3 लोग घायल हुए, जबकि बुधवार शाम करीब 5:45 बजे इंफाल ईस्ट जिले में ऑटोमैटिक स्मॉल आर्म्स के शॉट फायर किए गए।हालात देखते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार 24 जून को दिल्ली में सर्वदलीय बैठक बुलाई है।इस बैठक को कांग्रेस ने बहुत लेट और नाकाफी बताया है। कांग्रेस का कहना है कि अगर मणिपुर के लोगों के साथ बातचीत की कोशिश दिल्ली में बैठकर की जाएगी, तो इसमें गंभीरता नहीं दिखेगी।

केसी वेणुगोपाल बोले- सोनिया गांधी के संदेश के बाद जागी सरकार
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि सरकार तब जागी है जब सोनिया गांधी ने मणिपुर के लोगों को संबोधित किया। इस गंभीर समस्या पर होनी वाली बैठकों से PM का दूर रहना उनकी कायरता दिखाता है। इससे पता चलता है कि वे अपनी असफलताओं का सामना नहीं करना चाहते हैं। जब कई नेताओं ने कई बार उनसे मिलने की कोशिश की, तब भी वे समय नहीं निकाल सके।उन्होंने कहा कि अमित शाह जब से मणिपुर का दौरा करके लौटे हैं, तब से हालात और बिगड़ गए हैं। उनके दौरे से कोई बात नहीं बनी। वेणुगोपाल ने यह सवाल भी उठाया कि ऐसे हालात में भी मणिपुर की पक्षपात करने वाली सरकार को न हटाना और राष्ट्रपति शासन लागू न करना एक मजाक जैसा लग रहा है।

सोनिया गांधी ने वीडियो संदेश जारी करके कहा- यह हिंसा देश की अंतरात्मा पर गहरा घाव
कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने बुधवार को एक वीडियो संदेश जारी करके लोगों से शांति और सद्भाव बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि इस हिंसा ने ने हमारे राष्ट्र की अंतरात्मा पर एक गहरा घाव छोड़ है। इस हिंसा ने आपके राज्य (मणिपुर) में लोगों के जीवन को तबाह कर दिया और हजारों लोगों को उजाड़ दिया है। इस हिंसा ने हमारे राष्ट्र की अंतरात्मा में एक गहरा घाव छोड़ है। 4 मई से बंद स्कूलों की छुट्टियां 1 जुलाई तक बढ़ा दी गई हैं। इस बीच मणिपुर के 1,500 बच्चों ने मिजोरम के स्कूलों में एडमिशन ले लिया है।

  • मिजोरम के शिक्षा निदेशक लालसांग लियाना ने बताया कि विस्थापित बच्चों को सरकारी स्कूलों में मुफ्त में एडमिशन दिया गया।
  • मंगलवार को सेना ने प्रतिबंधित संगठन यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट (UNLF) के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया। उनके पास से 51 मिलीमीटर की मोर्टार और बम बरामद किया गया।
  • राज्य में इंटरनेट बैन को भी 25 जून तक बढ़ा दिया गया है, हालांकि मणिपुर HC ने राज्य सरकार को सीमित नेट सेवा प्रदान करने का निर्देश दिया है।

 

 

4 पॉइंट्स में जानिए क्या है मणिपुर हिंसा की वजह...
मणिपुर की आबादी करीब 38 लाख है। यहां तीन प्रमुख समुदाय हैं- मैतेई, नगा और कुकी। मैतई ज्यादातर हिंदू हैं। नगा-कुकी ईसाई धर्म को मानते हैं। ST वर्ग में आते हैं। इनकी आबादी करीब 50% है। राज्य के करीब 10% इलाके में फैली इम्फाल घाटी मैतेई समुदाय बहुल ही है। नगा-कुकी की आबादी करीब 34 प्रतिशत है। ये लोग राज्य के करीब 90% इलाके में रहते हैं।

कैसे शुरू हुआ विवाद: मैतेई समुदाय की मांग है कि उन्हें भी जनजाति का दर्जा दिया जाए। समुदाय ने इसके लिए मणिपुर हाई कोर्ट में याचिका लगाई। समुदाय की दलील थी कि 1949 में मणिपुर का भारत में विलय हुआ था। उससे पहले उन्हें जनजाति का ही दर्जा मिला हुआ था। इसके बाद हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से सिफारिश की कि मैतेई को अनुसूचित जनजाति (ST) में शामिल किया जाए।

मैतेई का तर्क क्या है: मैतेई जनजाति वाले मानते हैं कि सालों पहले उनके राजाओं ने म्यांमार से कुकी काे युद्ध लड़ने के लिए बुलाया था। उसके बाद ये स्थायी निवासी हो गए। इन लोगों ने रोजगार के लिए जंगल काटे और अफीम की खेती करने लगे। इससे मणिपुर ड्रग तस्करी का ट्राएंगल बन गया है। यह सब खुलेआम हो रहा है। इन्होंने नागा लोगों से लड़ने के लिए आर्म्स ग्रुप बनाया।

शांति समझौता हुआ, लेकिन बात नहीं बनी: 2008 में भारत सरकार, मणिपुर और इन संगठनों के बीच शांति समझौता हुआ। मैतेई समुदाय का आरोप है कि इसके बाद भी इस ग्रुप ने अवैध स्रोतों से कमाई जारी रखी। सियासी दल इनसे मदद लेने लगे। इससे इनका मनोबल बढ़ा। मार्च 2023 में सरकार ने समझौता रद्द कर दिया। अफीम की खेती नष्ट की जाने लगी। पहाड़ों से खदेड़े जाने लगे। इससे कुकी समुदाय नाराज था, लेकिन उसे हिंसा फैलाने का मुद्दा नहीं मिल रहा था। इस बीच हाई कोर्ट के आदेश से उसे हिंसा का मौका मिल गया और मणिपुर जलने लगा।

नगा-कुकी विरोध में क्यों हैं: बाकी दोनों जनजाति मैतेई समुदाय को आरक्षण देने के विरोध में हैं। इनका कहना है कि राज्य की 60 में से 40 विधानसभा सीट पहले से मैतेई बहुल इम्फाल घाटी में हैं। राजनीतिक रूप से मैतेई समुदाय का पहले से दबदबा है। ऐसे में ST वर्ग में मैतेई को आरक्षण मिलने से उनके अधिकारों का बंटवारा होगा। नगा-कुकी का यह भी दावा है कि मैतेई समुदाय आदिवासी नहीं है। इन्हें पहले से SC और OBC आरक्षण के साथ आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग का आरक्षण मिला हुआ है। ऐसे में इस समुदाय को और आरक्षण मिला तो बाकी जनजातियों के लिए अवसर कम हो जाएंगे।

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