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कर्नाटक के स्कूलाें में स्कर्ट पर पाबंदी की सिफारिश

कर्नाटक के स्कूलों में लड़कियों की यूनिफॉर्म बदलने की सिफारिश की गई है। कर्नाटक राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने शिक्षा विभाग को लेटर लिखा।

जिसमें उन्होंने तर्क दिया कि, स्कर्ट पहनने से लड़कियों को आने-जाने और खेलने-कूदने में परेशानी महसूस होती है। इसलिए स्कर्ट की बजाए पैंट या सलवार को ड्रेस कोड में शामिल किया जाए।

ड्रेस बदलने की मांग कहां से उठी
स्कर्ट पहनने वाली लड़कियों को होने वाली असुविधाओं पर आयोग को कलबुर्गी में महिला और बाल कल्याण विभाग के एक सहायक निदेशक ने लेटर लिखा था। इसमें उन्होंने क्लास 1 से लेकर 10वीं तक की लड़कियों की यूनिफॉर्म बदलने की बात कही है। 15 मई को लिखे गए लेटर में कहा गया है कि लड़कियां शर्मीली स्वभाव की होती हैं। ट्रैवल करते समय, भीड़-भाड़ वाले इलाकों में घूमने, साइकिल चलाने या स्पोर्ट एक्टिविटी में हिस्सा लेने में स्कर्ट पहनना थोड़ा अनकंफर्टेबल हो जाता है। इसलिए यूनिफॉर्म को सलवार या पैंट से बदला जाए।

यूनिफॉर्म बदलना है कि नहीं, यह शिक्षा विभाग तय करेगा
महिला और बाल कल्याण विभाग के अधिकारी की तरफ से मिली इस सिफारिश को बाल संरक्षण आयोग ने शिक्षा विभाग को फारवर्ड कर दिया। हालांकि इसके संबंध में आखिरी डिसीजन शिक्षा विभाग कमिश्नर को ही लेना है। बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष के नागन्ना गौड़ा ने कहा, यह एक सिफारिश है जो हमने की है। यूनिफॉर्म बदलना है या नहीं, यह शिक्षा विभाग को तय करना है। न केवल अधिकारियों से सिफारिशें मिली हैं, बल्कि हमने ग्रामीण क्षेत्रों की लड़कियों से भी बातचीत की है। उन सभी ने माना कि खेलते समय स्कर्ट पहनने में दिक्कत होती है। उत्तराखंड के तीन मंदिरों में महिलाओं और लड़कियों के लिए ड्रैस कोड लागू किया गया है। हरिद्वार के दक्ष प्रजापित मंदिर, पौड़ी के नीलकंठ महादेव मंदिर और देहरादून के टपकेश्वर महादेव मंदिर में लड़कियां छोटे कपड़े पहनकर दर्शन के लिए नहीं जा सकेंगी। इन तीनों मंदिरों को मैनेज करने वाले महानिर्वाणी अखाड़े ने यह आदेश जारी किया है। 

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