• 28-02-2024 18:47:16
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एक्सपोर्ट से पहले भारतीय कफ सिरप की टेस्टिंग जरूरी

भारत से विदेश भेजे जाने वाले सभी कफ सिरप की अब लैब टेस्टिंग होगी। लैब में परीक्षण के बाद ही सिरप को एक्सपोर्ट किया जा सकेगा। नया नियम 1 जून से लागू होगा। पिछले साल गाम्बिया में 66 और उज्बेकिस्तान में 18 बच्चों की मौत हुई थी। दावा किया गया था कि ये मौतें भारत में बनी खांसी की दवाइयों को पीने के बाद हुई हैं।

दवाइयों की क्वालिटी से कंप्रोमाइज नहीं
डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) ने सोमवार को एक नोटिफिकेशन जारी किया। नोटिफिकेशन के मुताबिक, बिना जांच और प्रमाण के कफ सिरप को विदेश नहीं भेजा जाएगा। DGFT से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि, भारत से एक्सपोर्ट की जाने वाली दवाइयों की क्वालिटी से कंप्रोमाइज नहीं किया जाएगा। राज्य सरकारें और दवाई बनाने वाली कंपनियां एक्सपोर्ट से पहले दवाई की टेस्टिंग को सुनिश्चित करें। फरवरी में, तमिलनाडु स्थित ग्लोबल फार्मा हेल्थकेयर ने अपने सभी आई ड्रॉप्स वापस मंगा लिए थे। वहीं WHO ने 2022 में भारत के चार कफ सिरप को लेकर अलर्ट जारी किया था। पिछले साल WHO ने इन चार सिरप को लेकर अलर्ट जारी किया था। ये भारत में नहीं बिकती हैं। इन्हें कंपनी केवल निर्यात करती है।

कौन सी लैब में होगी टेस्टिंग
सरकार ने टेस्टिंग के लिए जिन लैब्स को चुना है। उनमें भारतीय फार्माकोपिया आयोग, रीजनल ड्रग टेस्टिंग लैब (RDTL-चंडीगढ़), केंद्रीय दवा प्रयोगशाला (CDL-कोलकाता), केंद्रीय दवा टेस्टिंग लैब (CDTL-चेन्नई हैदराबाद, मुंबई), RDTL (गुवाहाटी) और NABL शामिल हैं।

भारत से 1.4 लाख करोड़ के कफ सिरप का एक्सपोर्ट
भारत ने 2022-23 में 1.4 लाख करोड़ के कफ सिरप को एक्सपोर्ट किया था, जबकि 2021-22 में भी यह लगभग इतना ही था। भारत पूरी दुनिया में चिकित्सा उत्पादों का एक प्रमुख मैन्यूफैक्चरर और एक्सपोर्टर है। यही नहीं दुनिया भर में किसी भी इलाज के वैक्सीनेशन में भारत का आधे से ज्यादा सहयोग रहता है।

50 परसेंट से अधिक जेनरिक दवाइयां भारत से 
दुनिया में जेनरिक दवाइयों की जितनी जरूरत होती है, उसका 50 परसेंट से अधिक भारत से भेजा जाता है। वहीं अमेरिका में लगभग 40 प्रतिशत जेनेरिक दवाओं की और ब्रिटेन में लगभग 25 प्रतिशत दवाओं की आपूर्ति की जाती है। पूरी दुनिया में भारत फार्मास्युटिकल जनरेशन के मामले में तीसरे स्थान पर है। भारत की दवा इंडस्टी में 3,000 दवा कंपनियां और लगभग 10,500 मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट शामिल हैं। वर्तमान में एड्स से निपटने के लिए विश्वस्तर पर उपयोग की जाने वाली 80 प्रतिशत से अधिक एंटीरेट्रोवाइरल दवाओं की आपूर्ति भारतीय दवा फर्मों द्वारा की जाती है।

 

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