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कुत्तों को भी मिला मूल निवासी का हक, केंद्र का नया निर्देश

केंद्र ने मंगलवार को स्थानीय निकायों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि सिर्फ मान्यता प्राप्त संगठन ही हाल में अधिसूचित नियमों के अनुसार आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण के लिए पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रम संचालित करें। जानवरों पर अत्याचार रोकने के लिए देश में पहली बार 1960 में पशु क्रूरता निवारण अधिनियम लाया गया था। केंद्र सरकार ने इसी अधिनियम के तहत पशु (कुत्ता) जन्म नियंत्रण नियमावली-2023 को अधिसूचित किया है।

नई नियमावली में स्पष्ट किया गया है कि उन क्षेत्रों में कुत्तों को खिलाने या आश्रय देने से भी कोई मना नहीं कर सकता है, जहां ये कुत्ते निवास कर रहे हैं। किसी क्षेत्र से कुत्तों को भगाए-हटाए बिना भी मनुष्यों एवं आवारा कुत्तों के बीच के संघर्षों से निपटने के उपाय तलाशे जा सकते हैं। वहीं मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय ने एक विज्ञप्ति में कहा कि नगर निगमों को संयुक्त रूप से पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रम (ABC) तथा रेबीज रोधी कार्यक्रम को कार्यान्वित करने की आवश्यकता है।

विज्ञप्ति में कहा गया है कि भारत पशु कल्याण बोर्ड और ‘पीपुल फॉर इलिमिनेशन ऑफ स्ट्रे ट्रबल्स' के बीच एक मामले में सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के बाद पशु जन्म नियंत्रण नियम, 2023 जारी किया गया है। मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय द्वारा 10 मार्च को अधिसूचित 2023 के नियमों ने पशु क्रूरता रोकथाम अधिनियम,1960 के तहत पशु जन्म नियंत्रण (कुत्ता) नियमों की जगह ली है। नए नियमों के अनुसार, आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण के लिए पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रम संबद्ध स्थानीय निकायों को मान्यता प्राप्त संगठनों द्वारा संचालित कराना होगा। 

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