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समुद्र में भी महंगे और जरूर खनिजों की खोज और खनन पर जोर देगा भारत

दिल्ली: कश्मीर में हाल ही में मिले लिथियम के अकूत भंडार के खजाने से देश में इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए बनाई जाने वाली बैटरियों के लिए पर्याप्त कच्चा माल अब देश में ही उपलब्ध हो जाएगा. इससे सरकार के इलेक्ट्रिक गाड़ियों की संख्या को तेजी से बढ़ाने का सपना पूरा होगा. इसके साथ ही भारत ने समुद्र में भी महंगे और जरूर खनिजों की खोज और खनन पर जोर दिया है. सरकार आने वाले समय में इस सेक्टर को निजी क्षेत्र के लिए भी खोल सकती है. इसके लिए खान मंत्रालय अब अपतटीय क्षेत्र खनिज विकास एवं नियमन अधिनियम, 2002 में संशोधन करने के बारे में विचार कर रहा है.

सरकार की कोशिशों ने अगर सफलता हासिल की तो जल्द ही देश में समुद्री खनिजों की पर्याप्त उपलब्धता संभव हो सकेगी. खान मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज ने कहा कि सरकार निकेल जैसे खनिजों के भंडार की समुद्री क्षेत्र में तलाश में जुटी हुई है और आगे चलकर इन भंडारों की बिक्री भी की जाएगी. खान मंत्रालय ने अपतटीय क्षेत्र खनिज विकास एवं नियमन अधिनियम, 2002 में संशोधन के लिए हितधारकों से इस पर राय मांगी है.

भारद्वाज ने उद्योग मंडल सीआईआई (CII) के एक कार्यक्रम में कहा कि 'महत्वपूर्ण खनिजों के बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण होते जाने से ऐसी सोच ने जन्म लिया है कि हम समुद्री क्षेत्र में इनका खनन क्यों नहीं कर रहे. दुर्भाग्यपूर्ण है कि हम समुद्री खनिजों का खनन नहीं कर पा रहे हैं. अब हम इस कानून को संशोधित कर रहे हैं और इस बारे में सभी हितधारक अपनी राय दे सकते हैं.'

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