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ऑनलाइन गेम खेलने के लिए करानी होगी केवाईसी

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों के लिए प्रस्तावित नियमों का ड्राफ्ट (मसौदा) सार्वजनिक किया। गेमिंग कंपनियों के लिए स्व-नियामक तंत्र और खिलाडिय़ों के अनिवार्य सत्यापन (केवाईसी) का प्रस्ताव है। कंपनियों को एक शिकायत अधिकारी नियुक्तकरना होगा, जो ऑनलाइन गेमिंग मध्यस्थ (इन्टर्मीडीएरी) का कर्मचारी होगा और भारत का ही निवासी होगा। मसौदे पर 17 जनवरी तक राय मांगी गई है।

अभी गेमिंग कंपनियों के लिए वही नियम लागू किए जा रहे हैं, जो 2021 में सोशल मीडिया कंपनियों पर लागू हुए थे। आईटी मंत्रालय ने ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों के लिए भारतीय कानूनों का अनुपालन जरूरी करने के साथ ही कहा है कि जुआ या सट्टेबाजी से संबंधित हर कानून इन पर भी लागू होगा। ऑनलाइन गेम जो भारतीय कानून के अनुरूप न हों, उनको कंपनियां न तो होस्ट करेंगी, न प्रदर्शित करेंगी, न अपलोड करेंगी और न ही प्रकाशित या प्रसारित करेंगी।
ड्राफ्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि कंपनियों को बच्चों (18 साल से कम उम्र वालों के लिए) की सुरक्षा के लिए उचित उपाय करने चाहिए। उनके लिए माता-पिता की सहमति और उम्र का ध्यान रखा जाना चाहिए।

खेल में शामिल होने वालों को जमा राशि की निकासी या रिफंड, जीती रकम मिलने और अन्य शुल्क के बारे में सूचना देनी होगी। इसके अलावा कंपनी को एक टीम (बॉडी) बनाकर इसका रजिस्ट्रेशन मंत्रालय में कराना होगा। यह टीम शिकायतों का निपटारा करेगा।
टीम में ऑनलाइन गेमिंग, सार्वजनिक नीति, आईटी, मनोविज्ञान, चिकित्सा जैसे क्षेत्रों के पांच सदस्यों का निदेशक बोर्ड होगा। आईटी राज्यमंत्री राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि ऑनलाइन गेमिंग नियम फरवरी की शुरुआत में तैयार हो जाएंगे।

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