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बिल्डर हुआ दिवालिया तब भी तुरंत प्रोजेक्ट प्रक्रिया होगी पूरी, जानिए नया नियम

नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर के कई इलाके में आपको रियल्टी प्रोजेक्ट बीच में अटके हुए मिल जाएंगे. बिल्डर ने किसी वजह से प्रोजेक्ट पूरा नहीं किया और दिवालिया होने के लिए आवेदन कर दिया है. बिल्डर के दिवालिया होने के आवेदन से लेकर उस प्रोजेक्ट का काम किसी और कंपनी को सौंपने और होम बायर को मिलने तक में सालों बीत जाते हैं और प्रॉपर्टी के खरीदार किराया और मासिक किस्त का बोझ उठाते रहते हैं. अगर आप या आपके जाने वाले लोगों में से कोई इस तरह की स्थिति का सामना कर रहा है तो अब उसके लिए राहत की खबर है.

भारत सरकार ने रियल एस्टेट बैंकरप्सी के मामलों को हैंडल करने के लिए नया नियम लाने का फैसला किया है. भारत सरकार के नए नियम से घर खरीदने वाले लोगों को काफी आसानी हो सकती है. अगर बिल्डर किसी वजह से प्रोजेक्ट का काम पूरा नहीं कर पाता तब भी उसके दिवालियापन की कार्रवाई और नई संस्था को इस प्रोजेक्ट को पूरा करने की जिम्मेदारी देने का काम बहुत तेजी से किया जा सकेगा.

भारत सरकार देश के इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड में बदलाव करने जा रही हैं. इससे प्रोजेक्ट के हिसाब से केस के निपटारे की अनुमति दी जा सकेगी. इस मामले से जुड़े लोगों ने यह जानकारी दी है. यह जानकारी अब तक सार्वजनिक नहीं हुई है. भारत सरकार द्वारा नियमों में किए जा रहे इस बदलाव की वजह से पूरे हो चुके अपार्टमेंट होम बायर को दिए जा सकेंगे, भले ही डेवलपर के दिवालियापन की प्रक्रिया चालू क्यों ना हो.

कॉरपोरेट अफेयर्स मिनिस्ट्री के प्रवक्ता ने हालांकि इस बारे में कोई कमेंट करने से मना कर दिया. भारत के रियल एस्टेट सेक्टर में पिछले कुछ सालों में बहुत से बिल्डर बायर के पैसे लेकर खुद को दिवालिया घोषित कर चुके हैं. इससे घर खरीदने वाले लोग अपने प्रोजेक्ट को लेकर अनिश्चितता के भंवर में डूब जाते हैं. उन्हें पता नहीं होता कि उनके घर की डिलीवरी कब होगी. एक घर खरीदने में आमतौर पर लोग अपने जीवन भर की पूंजी लगा देते हैं. मौजूदा नियमों के मुताबिक दिवालियापन की प्रक्रिया में बिल्डर के शामिल होते ही उसके सभी प्रोजेक्ट पर काम रोक दिया जाता है.

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