• 03-02-2023 10:25:06
  • Web Hits

Poorab Times

Menu

समंदर के किसान, 200 फीट गहरे समंदर में करते हैं 'खेती'

 जैसे हम आप जमीन पर बड़ी आसानी से घूमते हैं, अपना कामकाज करते हैं ठीक उसी तरह से समंदर के भीतर भी एक दुनिया पलती है। इंसान समंदर की गहराइयों में 'खेती' करते हैं। चौंकिए मत, ये हल जोतने वाले किसान नहीं होते हैं। पेट पालने के लिए ये लोग सी-फूड की तलाश में समुद्र की तलहटी खोदते हैं। आपको शायद लगे कि पूल में डाइव तो हम भी लगाते हैं लेकिन जरा सोचिए आप पानी के भीतर कितनी देर तक सांसें थामे रह सकते हैं। कुछ सेकेंड या मुश्किल से 1 मिनट। आपको जानकारी हैरानी होगी कि ये अजूबे इंसान 200 फीट की गहराई में 5 से 13 मिनट तक पानी के अंदर रह सकते हैं। ये कहानी है एक जनजाति की। दुनिया उन्हें बजाऊ समुदाय कहकर पुकारती है। उनके लिए चमचमाती सड़कें, इंटरनेट, मोबाइल जैसी मॉडर्न चीजों का कोई मतलब नहीं है। ये आज भी बरसों पुराने तरीके से अपना गुजर-बसर कर रहे हैं।

पुतली से टूटकर आंख में बाल चला जाए तो लोग टब या पानी से भरी बाल्टी में अपना चेहरा डालकर आंखें खोलते हैं। लेकिन जैसे ही आपको सांस लेने में दिक्कत महसूस होने लगती है आपका शरीर ऊपर की तरफ भागने लगता है। ऐसे समय में हार्ट रेट कम हो जाता है और शरीर में कई बदलाव देखने को मिलते हैं जिससे ऑक्सीजन की कमी होने पर ऊर्जा को बचाया जा सके। लेकिन पानी के भीतर बड़े आराम से घूमने वाले इन लोगों को क्या कहेंगे, जिनकी डाइविंग कमाल की है। इनकी पीठ पर कोई ऑक्सीजन सिलेंडर भी नहीं होता है। यह समुदाय मूल रूप से फिलीपींस के आसपास के इलाकों में समुद्र में रहता है। ये जमीन पर बहुत ही कम दिखते हैं। लोग इन्हें समुद्र के बंजारे भी कहते हैं। इनके पास किसी देश की राष्ट्रीयता नहीं है। शादी के समय ये काफी चमक-धमक वाले कपड़े पहनते हैं, बाकी समय तो ऐसे ही रहना है।

जमीन पर बैन तो...
इनके पानी में हमेशा रहने के पीछे की एक कहानी है। बताते हैं कि फिलीपींस के इन लोगों को बैन कर दिया गया था, यानी इन्हें जमीन से बेदखल कर दिया गया तो इन्होंने बरसों पहले समुद्र पर ही गांव बसा लिया। ये मलेशिया और इंडोनेशिया के तटों पर भी बांस के बने खंभों के सहारे खड़े घरों में पाए जाते हैं। कुछ नावों पर ही जीवन गुजारते हैं। आप इनकी जिंदगी को अजीब कह सकते हैं लेकिन यह कितना तकलीफदेह होता होगा कि बच्चों को पढ़ाई-लिखाई नहीं नाव चलाने और मछली पकड़ने का करतब सीखने पर ही पूरा जोर दिया जाता है।

पानी में खुली रहती है आंख
छोटे-छोटे बच्चे इतने प्रशिक्षित कर दिए जाते हैं कि पानी में देखने की उनके भीतर अद्भुत क्षमता विकसित हो जाती है। वे गहरे पानी में उतरकर अपनी आंखों से अच्छे से देखकर शिकार करते हैं। इस जनजाति के बच्चे जब समंदर में तैरते हैं तो आंखें बिल्कुल खुली रहती है। ये छोटी डॉल्फिन की तरह दिखते हैं। इन बच्चों का ज्यादातर समय समंदर की गहराइयों में भोजन की तलाश करते ही बीतता है।

समंदर के शिकारी
आपको शायद ताज्जुब हो कि ये अब भी मछली पकड़ने के लिए भाले का इस्तेमाल करते हैं। इसके साथ ही ये समुद्र की गहराइयों से ऐसी प्राकृतिक चीजें इकट्ठा करते हैं जिसका इस्तेमाल क्राफ्ट बनाने में किया जा सके।

सील से तुलना
सील एक ऐसा समुद्री स्तनधारी जीव होता है जो ज्यादातर समय अपना जीवन पानी में बिताता है। इन इंसानों की तुलना भी सील से की जाती है। शोध में पता चला कि इनका इम्युन सिस्टम धरती पर रहने वाले लोगों की तुलना में 50 फीसदी ज्यादा पाया गया। हालांकि अब इस समुदाय (Sea Nomad) के जीवन में जोखिम बढ़ रहा है। आधुनिक तरीके से मछली पकड़ने की तरकीब आने से इनके लिए भोजन की चीजें कम हो रही हैं। बजाऊ, ओरांग लाउट और मोकेन ये तीन जन समूहों को समुद्री खानाबदोश कहते हैं।

Add Rating and Comment

Enter your full name
We'll never share your number with anyone else.
We'll never share your email with anyone else.
Write your comment
CAPTCHA

Your Comments

Side link

Contact Us


Email:

Phone No.